भारतीय नौसेना का अदृश्य योद्धा: आईएनएस शिवालिक की ताकत
'अदृश्य योद्धा' ने उड़ाई चीन-पाक की नींद, रडार की आंखों से ओझल यह 'ब्रह्मास्त्र', समंदर में दुश्मन का है काल
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आईएनएस शिवालिक, भारतीय नौसेना का अदृश्य योद्धा, चीन और पाकिस्तान के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। इसकी स्टील्थ तकनीक और उच्च मारक क्षमता इसे दुश्मन के रडार से ओझल रखती है, जिससे यह समंदर में प्रभावी रूप से कार्य कर सकता है।
- 01आईएनएस शिवालिक की स्टील्थ तकनीक दुश्मन के रडार से इसे छिपाने में सक्षम है।
- 02इस युद्धपोत की मारक क्षमता इसे दुनिया के सबसे घातक फ्रिगेट्स में रखती है।
- 03आईएनएस शिवालिक में सुपरसोनिक मिसाइलें और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।
- 04यह युद्धपोत दुश्मन के सैन्य ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता रखता है।
- 05आईएनएस शिवालिक का निर्माण 'प्रोजेक्ट 17' के तहत हुआ है, जो स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।
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आईएनएस शिवालिक, भारतीय नौसेना का अदृश्य योद्धा, अपनी स्टील्थ तकनीक के कारण पाकिस्तान और चीन के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। 29 अप्रैल 2010 को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड से पहली बार समुद्र में उतरे इस युद्धपोत ने दुश्मनों की नींद उड़ा दी। इसकी विशेष डिजाइन और रडार सिग्नेचर को कम करने की तकनीक इसे दुश्मन के रडार से छिपाने में मदद करती है। आईएनएस शिवालिक की लंबाई 142 मीटर है, लेकिन यह रडार पर एक छोटी मछली पकड़ने वाली नाव के रूप में दिखाई देता है। इसके पास बेहतरीन सोनार और 'वरुणास्त्र' टॉरपीडो हैं, जो दुश्मन की सबमरीन को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा, आईएनएस शिवालिक में सुपरसोनिक मिसाइलें और एक मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम है, जो इसे दुश्मन के हवाई हमलों से भी बचाने में सक्षम बनाता है। इस युद्धपोत का निर्माण 'प्रोजेक्ट 17' के तहत हुआ है, जो भारत को रडार से बचने वाले युद्धपोतों के निर्माण में अग्रणी बनाता है।
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आईएनएस शिवालिक की उपस्थिति से भारत की समुद्री सुरक्षा में वृद्धि हुई है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
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