यूक्रेन की जंग में तकनीकी बदलाव: साइलेंट डेथ और रोबोटिक हथियार
न खाना, न पानी और न ही जमीन पर पैर...रूस के खिलाफ कैसे जंग लड़ रहा है यूक्रेन? क्या है साइलेंट डेथ?

Image: Zee News
यूक्रेन और रूस के बीच चल रही जंग में, यूक्रेन ने अब मशीनों और ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। ये तकनीकी उपकरण बिना मैनपावर के रूसी ठिकानों पर हमला कर रहे हैं, जिससे यूक्रेन को एक नया फायदा मिल रहा है।
- 01यूक्रेन ने रोबोटिक वाहनों और ड्रोन के माध्यम से रूस के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।
- 02यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बताया कि बिना पायलट वाले सिस्टम ने 22,000 मिशन पूरे किए हैं।
- 03रूसी सैनिकों ने इन रोबोटिक बम कैरियर को 'साइलेंट डेथ' नाम दिया है।
- 04यूक्रेन की सेना ने पहली बार केवल रोबोट और ड्रोन का उपयोग करके रूस के किसी क्षेत्र पर कब्जा किया।
- 05इन मशीनों की धीमी गति के कारण रूसी सैनिक उन्हें केवल 10 मीटर की दूरी पर सुन पाते हैं।
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यूक्रेन और रूस के बीच चल रही युद्ध में, यूक्रेन ने तकनीकी बदलाव करते हुए रोबोटिक वाहनों और ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। इन मशीनों को दूर से ऑपरेटर नियंत्रित करते हैं, जिससे यूक्रेन को बिना किसी सैनिक को मैदान में उतारे हमले करने का मौका मिल रहा है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन की सेना ने पहली बार केवल रोबोट और ड्रोन का उपयोग करके रूस के किसी क्षेत्र पर कब्जा किया है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बताया कि इस साल की शुरुआत से अब तक बिना पायलट वाले सिस्टम ने 22,000 मिशन पूरे किए हैं। इन रोबोटिक बम कैरियर को रूसी सैनिकों ने 'साइलेंट डेथ' का नाम दिया है, क्योंकि ये इतनी धीरे चलते हैं कि सैनिक उन्हें तब तक नहीं सुन पाते जब तक वे 10 मीटर की दूरी पर न हों। यह बदलाव पूर्वी यूक्रेन में लड़ाई के तरीके को पूरी तरह से बदल रहा है।
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यूक्रेन की सेना की तकनीकी क्षमताओं में वृद्धि से युद्ध की रणनीतियों में बदलाव आ रहा है।
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