नारद जयंती 2026: पूजा विधि और महत्व
Narad Jayanti 2026: आज है देवर्षि नारद जयंती? एक दिन की पूजा से बदल सकती है किस्मत, जानें सही विधि
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नारद जयंती, जो देवर्षि नारद के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है, का आयोजन 2 मई 2026 को होगा। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से जीवन में सुख और ज्ञान की प्राप्ति होती है। पूजा विधि में भगवान विष्णु और नारद जी की आराधना शामिल है।
- 01नारद जयंती 2026 का आयोजन 2 मई को होगा।
- 02इस दिन भगवान विष्णु और नारद जी की पूजा का महत्व है।
- 03सच्चे मन से पूजा करने से सुख और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
- 04नारद मुनि को 'प्रथम पत्रकार' और संदेशवाहक माना जाता है।
- 05पूजा विधि में गंगाजल का छिड़काव और दान का महत्व है।
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नारद जयंती, जो हर साल ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है, इस वर्ष 2 मई 2026 को होगी। इसे देवर्षि नारद के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें ब्रह्मांड का पहला संदेशवाहक और 'प्रथम पत्रकार' कहा जाता है। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और ज्ञान की प्राप्ति होती है। पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करना, घर में गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करना, भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाना और नारद जी का ध्यान करना आवश्यक है। इसके अलावा, जरूरतमंदों को दान देना भी शुभ माना जाता है। नारद मुनि की कथा के अनुसार, उन्होंने अपने पिछले जन्म में गंधर्व होने के कारण घमंड किया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें एक साधारण दासी के पुत्र के रूप में जन्म लेना पड़ा। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें महान देवर्षि नारद बनने का आशीर्वाद दिया।
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नारद जयंती पर पूजा करने से व्यक्ति को मानसिक शांति और ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है।
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