HUF बनाम व्यक्तिगत टैक्स: जानिए कौन है बेहतर विकल्प ₹12 लाख तक की टैक्स फ्री इनकम के लिए
HUF vs Individual Tax: कौन बचाएगा ज्यादा टैक्स? जानिए ₹12 लाख तक टैक्स फ्री इनकम का पूरा सच
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भारत में टैक्स प्लानिंग में HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) और व्यक्तिगत टैक्स के बीच सही विकल्प चुनना महत्वपूर्ण है। Individual टैक्सपेयर्स को ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम पर सेक्शन 87A के तहत रिबेट मिलता है, जबकि HUF को यह लाभ नहीं मिलता। सही जानकारी से टैक्स बचत में मदद मिल सकती है।
- 01Individual टैक्सपेयर्स को ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स छूट मिलती है।
- 02HUF को अलग टैक्स पहचान और PAN मिलता है, जिससे टैक्स बचत हो सकती है।
- 03सैलरी आय वालों के लिए Individual टैक्स अधिक लाभकारी है।
- 04HUF का लाभ तब होता है जब आय HUF के नाम पर दिखाई जा सके।
- 05दोनों टैक्स संरचनाओं का संयोजन बेहतर टैक्स बचत का अवसर दे सकता है।
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भारत में टैक्स प्लानिंग एक महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय है, खासकर जब बात HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) और व्यक्तिगत टैक्स की हो। दोनों टैक्स संरचनाओं में कुछ समानताएं हैं, जैसे कि टैक्स स्लैब और डिडक्शन, लेकिन असली अंतर तब सामने आता है जब हम रिबेट और आय के स्रोत की बात करते हैं। Individual टैक्सपेयर्स को ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम पर सेक्शन 87A के तहत रिबेट मिलता है, जिससे उनकी टैक्स लायबिलिटी शून्य हो जाती है, जबकि HUF को यह लाभ नहीं मिलता। HUF का एक बड़ा फायदा इसकी अलग टैक्स पहचान है, जिससे परिवार की कुछ आय को अलग से टैक्स किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी परिवार की कुल आय 24 लाख रुपये है, तो इसे 12-12 लाख में बांटकर अलग-अलग टैक्स लगाया जा सकता है। यदि आय सैलरी से आती है, तो Individual टैक्स अधिक लाभकारी होता है। सही टैक्स प्लानिंग के लिए अपनी आय के स्रोत को समझना और सही विकल्प चुनना आवश्यक है।
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सही टैक्स संरचना चुनने से परिवार की कुल टैक्स लायबिलिटी में कमी आ सकती है, जिससे उन्हें अधिक बचत करने में मदद मिलेगी।
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