सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: देशद्रोह के मामलों में सुनवाई जारी रखने की अनुमति
'अगर आरोपी को आपत्ति नहीं तो कोर्ट चला सकते हैं देशद्रोह का मुकदमा', सुप्रीम कोर्ट का फैसला
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह कानून (धारा 124ए) के तहत मामलों में सुनवाई को आगे बढ़ाने की अनुमति दी है, यदि आरोपित को कोई आपत्ति नहीं है। यह निर्णय एक ऐसे आरोपित की याचिका पर आया है जो 17 साल से जेल में है और अपनी अपील का जल्द निपटारा चाहता था।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि आरोपित को धारा 124ए के तहत चल रही अपील या ट्रायल से कोई आपत्ति नहीं है, तो अदालतें मामले का गुण-दोष के आधार पर निर्णय ले सकती हैं।
- 02यह निर्णय 17 साल से जेल में बंद एक आरोपित की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
- 03मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वह याचिकाकर्ता की अपील पर जल्द से जल्द फैसला करे।
- 04सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई 2022 को देशद्रोह कानून पर रोक लगाई थी, जिससे नई एफआइआर दर्ज करने और लंबित मामलों की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगी थी।
- 05इस कानून की आलोचना लंबे समय से हो रही थी, और इसके दुरुपयोग के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई हैं।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है जिसमें उसने स्पष्ट किया है कि यदि किसी आरोपित को देशद्रोह कानून (धारा 124ए) के तहत चल रही अपील या ट्रायल से कोई आपत्ति नहीं है, तो अदालतें मामले की सुनवाई और ट्रायल को आगे बढ़ा सकती हैं। यह निर्णय एक ऐसे आरोपित की याचिका पर आया है, जो 17 साल से जेल में है और अपनी अपील का जल्द निपटारा चाहता था। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि इस प्रावधान के तहत अदालतों को मामले का गुण-दोष (मेरिट) के आधार पर निर्णय लेने में कोई कानूनी अड़चन नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वह इस याचिकाकर्ता की अपील पर जल्द से जल्द कानून के अनुसार फैसला करे। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई 2022 को इस औपनिवेशिक कानून पर रोक लगाई थी, जिससे नई एफआइआर दर्ज करने और लंबित मामलों की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगी थी। इस कानून की आलोचना लंबे समय से हो रही थी, और इसके दुरुपयोग के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस नए रुख से उन कैदियों को राहत मिलेगी जो सालों से जेल में हैं।
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इस फैसले से उन आरोपितों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से जेल में हैं और जिनके मामलों पर सुनवाई रुकी हुई थी।
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