अरविंद सुब्रमण्यम की चेतावनी: आर्थिक संकट के और बिगड़ने की आशंका
Arvind Subramanian Warning: हालात और ज्यादा बिगड़ेंगे, दिग्गज अर्थशास्त्री की चेतावनी, पीएम मोदी की अपील पर यह रुख
Image: Nbt Navbharattimes
पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने चेतावनी दी है कि भारत की आर्थिक स्थिति 'किफायत और आजीविका का संकट' है, न कि विदेशी मुद्रा संकट। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध के चलते हालात और बिगड़ सकते हैं। पीएम मोदी की बचत करने की अपील का उन्होंने समर्थन किया है, लेकिन कहा कि यह असली बोझ को साझा करने का विकल्प नहीं है।
- 01सुब्रमण्यम ने कहा कि मौजूदा ऊर्जा संकट ने घरों और आजीविका पर दबाव डाला है, जिससे कीमतें बढ़ने की संभावना है।
- 02उन्होंने नीति निर्माताओं से कहा कि उन्हें विदेशी पूंजी आकर्षित करने पर कम ध्यान देना चाहिए और समाज के सभी वर्गों में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का बोझ समान रूप से साझा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- 03सुब्रमण्यम ने पीएम मोदी की अपील का समर्थन किया कि लोगों को विदेश यात्रा कम करनी चाहिए, क्योंकि इससे मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
- 04उन्होंने चेतावनी दी कि ईंधन, गैस और खाद की बढ़ती कीमतें गरीब परिवारों और किसानों को नुकसान पहुंचाएंगी।
- 05सुब्रमण्यम ने निजी निवेश में कमी का कारण बताते हुए कहा कि भारत में निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार को नीतियों में सुधार करना होगा।
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पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने हाल ही में भारत की आर्थिक स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट विदेशी मुद्रा संकट नहीं है, बल्कि यह 'किफायत और आजीविका का संकट' है। सुब्रमण्यम ने बताया कि अगर ईरान युद्ध लंबा खिंचता है, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की बचत करने की अपील का समर्थन किया, लेकिन यह भी कहा कि यह असली बोझ को साझा करने का विकल्प नहीं है। सुब्रमण्यम ने कहा कि मौजूदा ऊर्जा संकट ने पहले से ही घरों और आजीविका पर दबाव डाला है, और कीमतों में वृद्धि की संभावना है। उन्होंने नीति निर्माताओं से आग्रह किया कि उन्हें विदेशी पूंजी आकर्षित करने पर कम ध्यान देना चाहिए और समाज के सभी वर्गों में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का बोझ समान रूप से साझा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने निजी निवेश में कमी के कारणों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत को निवेश को आकर्षित करने के लिए नीतियों में सुधार करने की आवश्यकता है।
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यदि ईंधन और खाद की कीमतें बढ़ती हैं, तो इससे गरीब परिवारों और किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
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