प्रधानमंत्री मोदी का नॉर्वे दौरा: 43 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री की ऐतिहासिक यात्रा
नॉर्वे पहुंचे PM मोदी, 43 वर्षों के बाद पहुंचा कोई भारतीय प्रधानमंत्री, यूरोप में नये युग की होगी शुरुआत
Image: Nbt Navbharattimes
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में दो दिवसीय दौरे की शुरुआत की है, जो 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला दौरा है। यह यात्रा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के संदर्भ में हो रही है, जिसमें नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के नेता शामिल होंगे।
- 011983 में इंदिरा गांधी के बाद, यह पहला मौका है जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री नॉर्वे आया है।
- 02नॉर्वे की GDP 1.9 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है, और यह ग्रीन हाइड्रोजन व सतत महासागर शासन में अग्रणी है।
- 03भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन की प्रक्रिया 2018 में शुरू हुई थी और यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है।
- 04नॉर्वे के दूत मे-एलिन स्टेनर ने मोदी की यात्रा को 'ऐतिहासिक' बताया है।
- 05शिखर सम्मेलन का एजेंडा हरित बदलाव, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल नवाचार पर केंद्रित है।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 18 मई को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचे, जो कि 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला दौरा है। इससे पहले, इंदिरा गांधी ने जून 1983 में नॉर्वे का दौरा किया था। मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब यूरोप एक गंभीर सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए हरित प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता बढ़ रही है। ओस्लो में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के नेता शामिल होंगे। मोदी ने कहा कि यह यात्रा भारत-नॉर्वे संबंधों को और मजबूत करेगी। नॉर्वे के दूत मे-एलिन स्टेनर ने इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए सकारात्मक परिणामों की उम्मीद जताई। शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा हरित बदलाव, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल नवाचार पर केंद्रित है, जो भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा।
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प्रधानमंत्री मोदी का नॉर्वे दौरा भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो जलवायु परिवर्तन और हरित प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित है।
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