महिला आरक्षण विधेयक: विपक्ष के विरोध से फिर अटका
विचार: फिर अटका महिला आरक्षण
Jagran
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मोदी सरकार ने महिला आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण यह पारित नहीं हो सका। इससे 2029 के आम चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने की संभावना ठंडे बस्ते में चली गई।
- 01महिला आरक्षण विधेयक 2023 का विरोध विपक्ष ने किया, जिससे यह पारित नहीं हो सका।
- 02विधेयक के गिरने से 2029 के आम चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की संभावना समाप्त हो गई।
- 03विपक्ष ने क्षेत्रीय हितों के आधार पर विधेयक का विरोध किया, जबकि यह राष्ट्रीय हित के लिए था।
- 04महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच संकीर्णता देखने को मिली।
- 05भाजपा विपक्ष के रवैये को राजनीतिक रूप से भुनाने का प्रयास करेगी।
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मोदी सरकार ने संसद के विशेष सत्र में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने हेतु संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों ने अपने-अपने हितों के आधार पर इस विधेयक का विरोध किया, जिससे यह विधेयक गिर गया। महिला आरक्षण की पहल अब ठंडे बस्ते में चली गई है, और इसके लागू होने की संभावना 2034 के चुनावों तक खिसक गई है। विपक्षी दलों ने यह समझाने में असफलता दिखाई कि उनके विरोध का औचित्य क्या था। भाजपा इस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश करेगी, जबकि कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती जा रही है। यह स्थिति दर्शाती है कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच संकीर्णता और स्वार्थ की भावना हावी है।
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महिला आरक्षण विधेयक के गिरने से महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी आएगी, जो समाज में उनकी स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
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