भगवान शिव के माथे पर चंद्रमा का महत्व और चंद्र दोष से मुक्ति के उपाय
महादेव ने अपने माथे पर क्यों धारण किया चंद्रमा? जानें शिव पूजा से चंद्र दोष दूर करने का महाउपाय
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भगवान शिव ने अपने माथे पर चंद्रमा को धारण किया है, जिसका धार्मिक महत्व है। चंद्र देवता के साथ उनके संबंध की पौराणिक कथाएं हैं, जिसमें राजा दक्ष की कन्याओं का श्राप और समुद्र मंथन का विष शामिल है। चंद्र दोष से मुक्ति के लिए शिव पूजा के विशेष उपाय भी बताए गए हैं।
- 01भगवान शिव का चंद्रमा धारण करना चंद्र देवता के साथ उनके संबंध को दर्शाता है।
- 02राजा दक्ष ने चंद्र देवता को श्राप दिया था, जिसके बाद चंद्रमा कमजोर हो गया।
- 03महादेव ने चंद्रमा को अपने माथे पर धारण किया ताकि विष का तापमान संतुलित हो सके।
- 04सोमवार को शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है।
- 05शिव पूजा में सफेद चंदन और विशेष मंत्रों का जप करने से चंद्र दोष दूर होता है।
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भगवान शिव, जिन्हें महादेव कहा जाता है, ने अपने माथे पर चंद्रमा को धारण किया है, जिसका धार्मिक महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्र देवता का विवाह राजा दक्ष की 27 कन्याओं से हुआ था, लेकिन जब चंद्रमा ने रोहिणी को अधिक प्रेम दिया, तो अन्य कन्याएं दुखी होकर अपने पिता के पास गईं। राजा दक्ष ने क्रोधित होकर चंद्र देवता को श्राप दिया, जिससे वह क्षय रोग का शिकार हो गए। नारद जी ने चंद्रमा को भगवान शिव की शरण में जाने की सलाह दी, जिसके बाद महादेव ने उनकी सहायता की। दूसरी कथा में, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को पीकर शिव ने चंद्रमा को अपने माथे पर रखा ताकि विष की गर्मी को संतुलित किया जा सके। चंद्र दोष से मुक्ति के लिए सोमवार को शिवलिंग पर दूध अर्पित करने, सफेद चंदन का तिलक करने और विशेष मंत्रों का जप करने के उपाय बताए गए हैं।
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चंद्र दोष से मुक्ति के उपाय से भक्तों को मानसिक शांति और सुख की प्राप्ति हो सकती है।
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