सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा को हेट स्पीच मामले में दी राहत
'अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के खिलाफ नहीं बनता कोई संज्ञेय अपराध', हेट स्पीच मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के खिलाफ 2020 में दिए गए कथित नफरती भाषणों को संज्ञेय अपराध नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि भाषणों में किसी विशेष समुदाय के खिलाफ बयान नहीं थे और ना ही उन्होंने हिंसा को भड़काया।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नफरती भाषणों में कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता।
- 02भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर और मंत्री परवेश वर्मा के भाषणों पर निर्णय दिया गया।
- 03माकपा नेताओं की याचिका को कोर्ट ने खारिज किया।
- 04भाषणों में किसी समुदाय के खिलाफ बयान नहीं थे।
- 05कोर्ट ने कहा कि भाषणों ने हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था को नहीं भड़काया।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर (भाजपा सांसद) और परवेश वर्मा (दिल्ली सरकार में मंत्री) द्वारा दिए गए कथित नफरती भाषणों के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं माना। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने माकपा के नेताओं वृंदा करात और के.एम. तिवारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि भाषणों में कोई संज्ञेय अपराध का गठन नहीं होता है और ये किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं थे। इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि भाषणों ने हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था को भड़काने का काम नहीं किया।
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