भारत इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में पीछे, नेपाल और वियतनाम ने की प्रगति
इलेक्ट्रिक कारों की रेस में भारत पीछे, नेपाल और वियतनाम भी निकले आगे

Image: Business Standard
भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री का हिस्सा केवल 4 प्रतिशत है, जबकि नेपाल और वियतनाम जैसे देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत सरकार ने 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है।
- 01भारत में 2022 में नई कारों की बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों का हिस्सा केवल 4 प्रतिशत था।
- 02नेपाल में 2025 तक इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 68 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
- 03वियतनाम में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 2020 में शून्य से बढ़कर 2025 में 41 प्रतिशत होने की उम्मीद है।
- 04चीन में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत है, जबकि अमेरिका में यह 10 प्रतिशत है।
- 05भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की धीमी वृद्धि का मुख्य कारण चार्जिंग स्टेशनों की कमी है।
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भारत में नई कारों की बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी केवल 4 प्रतिशत है, जबकि नेपाल और वियतनाम जैसे देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इंटरनैशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के अनुसार, 2025 तक वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। भारत सरकार ने 2030 तक इस हिस्सेदारी को 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। इस समय, टाटा मोटर्स और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा जैसी कंपनियों का इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में 60 प्रतिशत हिस्सा है। नेपाल में 2025 में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 68 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि वियतनाम में यह 41 प्रतिशत होगी। इसके विपरीत, भारत अन्य एशियाई देशों जैसे थाईलैंड, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया से पीछे है। चार्जिंग स्टेशनों की कमी भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की धीमी वृद्धि का मुख्य कारण है।
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भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में वृद्धि से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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