नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कॉलेजों में चार वर्षीय पाठ्यक्रमों के लिए सीमित विषयों की पेशकश
राष्ट्रीय शिक्षा नीति: कॉलेजों में चार वर्षीय कोर्स के लिए सीमित विषय; विद्यार्थियों को करनी होगी पड़ताल

Image: Amar Ujala
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत, कॉलेजों में चार वर्षीय पाठ्यक्रमों के लिए सीमित विषयों की पेशकश की गई है। छात्रों को प्रवेश आवेदन भरने से पहले विषयों की स्थिति की पुष्टि करनी होगी। विज्ञान, वाणिज्य और पारंपरिक कला विषयों को प्राथमिकता दी गई है।
- 01नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्मारक महाविद्यालय में 27 में से 10 विषय पुरानी व्यवस्था में रहेंगे।
- 02राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला में 28 में से 18 विषय तीन वर्षीय डिग्री के रूप में पढ़ाए जाएंगे।
- 03चार वर्षीय कार्यक्रम में विज्ञान, वाणिज्य और पारंपरिक कला विषयों को प्राथमिकता दी गई है।
- 04कई कौशल आधारित और व्यावसायिक पाठ्यक्रम अभी चार वर्षीय कार्यक्रम से बाहर हैं।
- 05विषय चयन का आधार शोध क्षमता है, केवल मांग नहीं।
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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत, कॉलेजों में चार वर्षीय पाठ्यक्रमों के लिए विषयों की पेशकश सीमित कर दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक हरीश कंवर के अनुसार, विभिन्न कॉलेजों में विषयों की स्थिति भिन्न है। उदाहरण के लिए, नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्मारक महाविद्यालय हमीरपुर में 27 विषयों में से 10 पुरानी व्यवस्था के तहत रहेंगे। इसी प्रकार, राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला में 28 में से 18 विषय तीन वर्षीय डिग्री के रूप में पढ़ाए जाएंगे। चार वर्षीय कार्यक्रम में विज्ञान, वाणिज्य और पारंपरिक कला विषयों को अधिक प्राथमिकता दी गई है, जिनमें अंग्रेजी, गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान शामिल हैं। हालांकि, कौशल आधारित और व्यावसायिक पाठ्यक्रम जैसे पत्रकारिता, पर्यटन प्रबंधन और कंप्यूटर एप्लीकेशन अभी चार वर्षीय कार्यक्रम से बाहर हैं। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे प्रवेश आवेदन भरने से पहले महाविद्यालय से विषयवार स्थिति की पुष्टि करें। शिक्षा विभाग ने बताया कि विषय चयन का आधार शोध क्षमता है, केवल मांग नहीं।
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छात्रों को अब सीमित विषयों में प्रवेश लेना होगा, जिससे उनकी शैक्षिक योजना प्रभावित हो सकती है।
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