अक्षय तृतीया 2026: महत्व और मान्यताएँ
धनवान हुए सुदामा, पांडवों को मिला 'अक्षय पात्र', यूं ही अक्षय तृतीया नहीं कहलाती अबूझ मुहूर्त
Aaj Tak
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अक्षय तृतीया का त्योहार 19 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा, जो हर साल वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है। इसे सबसे शुभ दिन माना जाता है, जब दान-धर्म का फल अक्षय होता है। इस दिन भगवान विष्णु के अवतारों और पांडवों की कहानियाँ जुड़ी हुई हैं।
- 01अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।
- 02यह दिन दान-धर्म के कार्यों के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
- 03सतयुग का समापन और त्रेतायुग का आरंभ इसी दिन हुआ था।
- 04भगवान विष्णु के अवतार परशुराम का जन्म भी अक्षय तृतीया को हुआ।
- 05पांडवों को अक्षय पात्र इसी दिन प्रदान किया गया था।
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अक्षय तृतीया का त्योहार हर साल वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जो इस वर्ष 19 अप्रैल 2026 को आएगा। इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है, जब दान-धर्म के कार्यों का फल अक्षय होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन सतयुग का समापन और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। भगवान विष्णु के पहले चार अवतारों का संबंध सतयुग से है, जबकि त्रेतायुग में भगवान राम का प्राकट्य हुआ। इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म भी हुआ था। महाभारत काल में पांडवों को अक्षय पात्र इसी दिन प्रदान किया गया था, जिससे उन्हें कभी अन्न की कमी नहीं हुई। इसके अलावा, सुदामा की दरिद्रता दूर करने की कहानी भी अक्षय तृतीया से जुड़ी हुई है।
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अक्षय तृतीया पर दान-धर्म के कार्यों का महत्व बढ़ता है, जिससे समाज में सहयोग और एकता की भावना को बढ़ावा मिलता है।
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