संध्या देवी की कहानी: झारखंड में सोनाली मुर्गी पालन से आर्थिक आत्मनिर्भरता
झारखंड में सोनाली मुर्गी ने बदली संध्या की तकदीर, अंडे बेचकर हर रोज कर रहीं कमाई
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Image: Jagran
झारखंड के पलामू जिले की संध्या देवी ने सोनाली मुर्गी पालन से अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। उन्होंने 10 चूजे खरीदकर अब रोजाना 70 से 90 रुपये की आय अर्जित की है, जिससे न केवल उनका परिवार लाभान्वित हुआ है, बल्कि अन्य महिलाएं भी इस व्यवसाय की ओर आकर्षित हो रही हैं।
- 01संध्या देवी ने सोनाली मुर्गी पालन से आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है।
- 02वह प्रतिदिन 9 अंडे बेचकर 70 से 90 रुपये कमा रही हैं।
- 0313 महीनों में अंडा बिक्री से उनकी कुल कमाई 27,300 रुपये हुई है।
- 04उनके पति भी इस व्यवसाय में सहयोग कर रहे हैं।
- 05अन्य महिलाएं भी इस व्यवसाय में शामिल हो रही हैं, विशेषकर एकल और विधवा महिलाएं।
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झारखंड के पलामू जिले के सेमरी गांव की संध्या देवी ने सोनाली नस्ल की मुर्गियों के पालन से अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। संध्या देवी, जो सीता स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं, ने अक्टूबर 2024 में 10 चूजे खरीदे थे। नियमित देखभाल के बाद, जनवरी 2025 से मुर्गियों ने अंडा देना शुरू किया। अब वह प्रतिदिन लगभग 9 अंडे बेचकर 70 से 90 रुपये तक की आमदनी कर रही हैं। पिछले 13 महीनों में, उन्होंने अंडा बिक्री से 27,300 रुपये की कमाई की है। इस अतिरिक्त आय से वह अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं और परिवार के पोषण स्तर में सुधार कर रही हैं। संध्या देवी ने मुर्गियों की संख्या बढ़ाकर 40 कर दी है, और उनके पति भी इस काम में सहयोग कर रहे हैं। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के माध्यम से, अन्य महिलाएं भी इस व्यवसाय में शामिल हो रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है।
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संध्या देवी की सफलता से अन्य महिलाएं भी स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित हो रही हैं, जिससे क्षेत्र में आर्थिक विकास हो रहा है।
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