बारामूला के गणेश मंदिर में 37 साल बाद गूंजा शंखनाद, कश्मीरी पंडितों की भावनाएं उमड़ीं
कश्मीर में 37 साल बाद बारामूला के ऐतिहासिक गणेश मंदिर में गूंजा शंखनाद, खुशी से नम हुई कश्मीरी पंडितों की आंखें
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कश्मीर घाटी में बारामूला के कछुआ मुकाम में ऐतिहासिक गणेश मंदिर में 36 साल बाद पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। कश्मीरी पंडितों ने अपनी वापसी को भावनात्मक और प्रतीकात्मक बताया, जबकि स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने सहयोग किया। यह घटना कश्मीर में सामान्य होते हालात का संकेत है।
- 01कश्मीरी पंडितों ने 36 साल बाद गणेश मंदिर में पूजा की
- 02स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने आयोजन में सहयोग किया
- 03बारामूला के डिप्टी कमिश्नर ने इसे भाईचारे का प्रतीक बताया
- 04मंदिर के जीर्णोद्धार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना
- 05यह घटना कश्मीर में सामान्य होते हालात का संकेत है
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कश्मीर घाटी में बारामूला के कछुआ मुकाम में ऐतिहासिक गणेश मंदिर में लगभग 36 साल बाद पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। कश्मीरी पंडितों ने इस अवसर पर भावुकता के साथ अपनी वापसी का जश्न मनाया। स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने इस आयोजन में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे भाईचारे और एकता का संदेश मिला। बारामूला के डिप्टी कमिश्नर, सैयद फखरुद्दीन हामिद, ने इसे सामान्य होते हालात का संकेत बताया और कहा कि यह धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का एक अवसर है। उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार की योजना की भी जानकारी दी। कश्मीरी पंडितों ने इस पल को अपने गांव में लौटने की उम्मीद के रूप में देखा और इसे एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना।
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यह घटना कश्मीरी पंडितों के लिए एक नई आशा का संचार करती है और कश्मीर में धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देती है।
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