क्या एआई का बुलबुला फूटने वाला है? कंपनियों को कर्मचारियों की कमी का सामना
क्या कंपनियों को खल रही कर्मचारियों की कमी? फूट रहा AI का बुलबुला

Image: Aaj Tak
टेक कंपनियों में हालिया छंटनियों के बाद, एआई की उच्च लागत और कर्मचारियों की कमी ने गंभीर प्रश्न उठाए हैं। कंपनियों को अब महसूस हो रहा है कि एआई, मानव श्रम की तुलना में महंगा साबित हो रहा है, जिससे उन्हें वित्तीय नुकसान और कार्यक्षमता में कमी का सामना करना पड़ रहा है।
- 01कंपनियों ने एआई को लागत कम करने का उपाय समझा, लेकिन अब यह महंगा साबित हो रहा है।
- 02उबर के COO ने बताया कि उनकी कंपनी ने 2026 के एआई बजट का बड़ा हिस्सा पहले चार महीनों में खर्च कर दिया।
- 03माइक्रोसॉफ्ट ने बढ़ती लागत को देखते हुए अपने इंजीनियर्स के लिए एआई लाइसेंस कम किया।
- 04एक क्लाइंट का एआई बिल एक महीने में $500 मिलियन (करीब 4200 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया।
- 05कंपनियों को अब अनुभवी कर्मचारियों की कमी खल रही है, जो एआई द्वारा जेनरेट किए गए काम को ठीक कर सकें।
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हाल के वर्षों में टेक कंपनियों में छंटनी और एआई का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिससे कंपनियों ने मानव श्रम को कम करने का प्रयास किया। हालांकि, अब कंपनियों को एहसास हो रहा है कि एआई की लागत मानव श्रम से कहीं अधिक हो रही है। उदाहरण के लिए, उबर के COO एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने बताया कि उनकी कंपनी ने 2026 के लिए निर्धारित एआई बजट का बड़ा हिस्सा पहले चार महीनों में ही खर्च कर दिया। इसी तरह, माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने इंजीनियर्स के लिए एआई लाइसेंस कम करने का निर्णय लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक क्लाइंट का एआई बिल एक महीने में $500 मिलियन तक पहुंच गया था। इस स्थिति में, कंपनियों को अब अनुभवी कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जो एआई द्वारा जेनरेट किए गए काम की गुणवत्ता को बनाए रख सकें।
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कंपनियों को वित्तीय नुकसान और कार्यक्षमता में कमी का सामना करना पड़ रहा है।
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