पटना हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: संदेह के आधार पर तलाक नहीं हो सकता
Patna High Court: संदेह के आधार पर तलाक नहीं, निभाना ही होगा 'सात जन्मों' वाला बंधन
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि तलाक के लिए ठोस साक्ष्य की आवश्यकता है और केवल संदेह के आधार पर विवाह विच्छेद नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति नानी तगिया और न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने सिवान परिवार न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पति की तलाक की याचिका को खारिज किया गया था।
- 01तलाक के लिए ठोस साक्ष्य की आवश्यकता है।
- 02सिर्फ संदेह के आधार पर विवाह विच्छेद नहीं किया जा सकता।
- 03व्यभिचार जैसे गंभीर आरोपों के लिए स्पष्ट तथ्य जरूरी हैं।
- 04पति को पत्नी पर आरोप लगाने के लिए ठोस विवरण प्रस्तुत करना होगा।
- 05सिवान परिवार न्यायालय का फैसला हाईकोर्ट ने बरकरार रखा।
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पटना, बिहार में पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमें कहा गया है कि तलाक के लिए केवल संदेह के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता। न्यायमूर्ति नानी तगिया और न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी जीवनसाथी पर अवैध संबंधों का आरोप लगाने के लिए ठोस साक्ष्य और स्पष्ट तथ्यों का होना अनिवार्य है। इस मामले में, पति ने अपनी पत्नी पर अवैध संबंध का आरोप लगाया था, लेकिन आवश्यक विवरण जैसे नाम, समय और स्थान का अभाव था। कोर्ट ने सिवान परिवार न्यायालय के फैसले को सही मानते हुए पति की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि व्यभिचार जैसे गंभीर आरोपों को साबित करने की जिम्मेदारी आरोप लगाने वाले पक्ष पर होती है और बिना ठोस साक्ष्य के तलाक की याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।
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इस फैसले का मतलब है कि विवाहिक विवादों में संदेह के आधार पर तलाक लेना मुश्किल होगा, जिससे वैवाहिक स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
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