मध्य प्रदेश में हिंदी में इंजीनियरिंग शिक्षा की पहल में कमी, छात्रों की संख्या में गिरावट
MP में हिंदी में इंजीनियरिंग पढ़ाई का सपना अधूरा, माध्यम 'तकनीकी' पेंच में फंसा, 3 साल में मिले महज 313 छात्र
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मध्य प्रदेश में हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग शिक्षा की योजना को छात्रों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिला है। पिछले तीन वर्षों में केवल 313 छात्रों ने इस माध्यम को चुना है, जिससे यह पहल ठहराव का शिकार हो गई है। यदि सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह योजना कागजों तक ही सीमित रह सकती है।
- 01हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग शिक्षा की योजना में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है।
- 02सिर्फ 313 छात्रों ने पिछले तीन वर्षों में इस माध्यम को चुना है।
- 03शैक्षणिक ढांचे और संसाधनों की कमी ने इस पहल को कमजोर किया है।
- 04इंदौर का एक कॉलेज इस पहल में अपवाद बना है, जहां छात्रों की संख्या अपेक्षा से अधिक है।
- 05उच्च शिक्षा मंत्री ने सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया है।
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मध्य प्रदेश में हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग शिक्षा की पहल, जो सत्र 2022-23 में शुरू हुई थी, अब ठहराव का शिकार होती नजर आ रही है। इस योजना के तहत 150 इंजीनियरिंग कॉलेजों में से चार संस्थानों में हर साल 224 सीटों पर हिंदी में इंजीनियर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, पिछले तीन वर्षों में महज 313 छात्रों ने इस माध्यम को चुना है, जो इस योजना की वास्तविकता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदी में इंजीनियरिंग शिक्षा शुरू करने से पहले आवश्यक शैक्षणिक ढांचा तैयार नहीं किया गया। पाठ्यक्रम, विषय विशेषज्ञ प्राध्यापक और तकनीकी शब्दावली की कमी ने इसे कमजोर बना दिया है। इंदौर का एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च इस पहल में एक अपवाद बना है, जहां कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (इंडियन लैंग्वेज) में छात्रों की संख्या 78 है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने इस योजना के सुधार के लिए प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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यदि सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग शिक्षा की यह महत्वाकांक्षी योजना छात्रों के लिए उपलब्ध नहीं हो सकेगी।
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