दिल्ली में नकली दवाओं के संगठित कारोबार का भंडाफोड़, बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां
नकली दवाओं से 'मौत' का कारोबार, दिल्ली में फैक्ट्री से मरीज तक फैला सिंडिकेट; एजेंसियों की छापामारी में बड़े खुलासे
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Image: Jagran
दिल्ली, भारत में नकली दवाओं का कारोबार एक संगठित और बहुस्तरीय नेटवर्क बन गया है, जिसमें सरकारी एजेंसियों की छापामारी के दौरान कई गिरफ्तारियां हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या को खत्म करने के लिए कानून के सख्त प्रवर्तन के साथ-साथ डिजिटल निगरानी और उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता है।
- 01नकली दवाओं का कारोबार संगठित और बहुस्तरीय हो गया है।
- 02सरकारी छापामारी में 7,895 गिरफ्तारियां हुई हैं।
- 03क्यूआर कोड के बावजूद नकली दवाएं पकड़ में नहीं आ रही हैं।
- 04उपभोक्ताओं को नकली दवाओं की पहचान के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता है।
- 05विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या का समाधान केवल कानून से नहीं होगा।
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दिल्ली में नकली दवाओं का कारोबार अब एक संगठित और बहुस्तरीय नेटवर्क बन चुका है, जिसमें सरकारी एजेंसियों की हालिया छापामारी से कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं। इस नेटवर्क में दवाओं का निर्माण, री-पैकेजिंग और वितरण शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में 6,860 मामले दर्ज किए गए हैं और 7,895 लोग गिरफ्तार हुए हैं। इस दौरान 35 लाख से अधिक नकली टैबलेट और 1.20 लाख सिरप की बोतलें जब्त की गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून को सख्त करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्हें विश्वास है कि सप्लाई चेन की डिजिटल निगरानी और नियमित निरीक्षण के साथ-साथ उपभोक्ताओं की जागरूकता भी आवश्यक है। हालांकि, क्यूआर कोड को ट्रेसबिलिटी के लिए अनिवार्य किया गया है, लेकिन अपराधी फर्जी क्यूआर कोड बनाकर उपभोक्ताओं को धोखा दे रहे हैं।
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इस कार्रवाई से उपभोक्ताओं को नकली दवाओं के खतरे से बचाने में मदद मिलेगी, जिससे उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा बढ़ेगी।
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