केदारनाथ यात्रा के लिए घोड़े-खच्चरों की संख्या सीमित, नई एसओपी लागू
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर 5000 घोड़े-खच्चर ही होंगे संचालित, म्यूल टास्क फोर्स रखेगी नजर; SOP हुई जारी
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उत्तराखंड सरकार ने केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की संख्या को सीमित करने के लिए मानक प्रचालन कार्यविधि (एसओपी) जारी की है। केदारनाथ मार्ग पर 5000, यमुनोत्री मार्ग पर 595 और हेमकुंड साहिब मार्ग पर 1050 पशुओं के संचालन की अनुमति होगी।
- 01एसओपी के तहत यात्रा मार्गों पर सभी अश्ववंशीय पशुओं का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
- 02पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण और माइक्रोचिपिंग आवश्यक होगी।
- 03अधिक भार लादने और पशु क्रूरता पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- 04म्यूल टास्क फोर्स यात्रा मार्गों पर निगरानी रखेगी।
- 05सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पूर्व घोड़े-खच्चरों का संचालन प्रतिबंधित रहेगा।
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उत्तराखंड सरकार ने केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब और आदि कैलास यात्रा मार्गों पर घोड़े-खच्चरों के संचालन के लिए एक नई मानक प्रचालन कार्यविधि (एसओपी) लागू की है। इस एसओपी के तहत, केदारनाथ मार्ग पर 5000, यमुनोत्री मार्ग पर 595 और हेमकुंड साहिब मार्ग पर 1050 घोड़े-खच्चरों के संचालन की अनुमति दी गई है। सभी पशुओं का पंजीकरण अनिवार्य होगा और स्वास्थ्य परीक्षण, ग्लैंडर्स जांच, इयर टैगिंग और माइक्रोचिपिंग आवश्यक होगी। अपंजीकृत पशुओं का संचालन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। इसके अतिरिक्त, म्यूल टास्क फोर्स यात्रा मार्गों पर निगरानी रखेगी, जिसमें पशुपालन विभाग के चिकित्सक और जिला पंचायत के कर्मी शामिल होंगे। यात्रा के दौरान पशुओं के कल्याण के लिए हर एक किलोमीटर पर पानी, चारा और इलेक्ट्रोलाइट की व्यवस्था की जाएगी। एसओपी में पशु क्रूरता के मामलों में कड़ी कार्रवाई का प्रावधान भी है।
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नई एसओपी से यात्रा मार्गों पर पशुओं की संख्या नियंत्रित होगी, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और पशुओं के कल्याण में सुधार होगा।
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