नैनीताल हाई कोर्ट ने आईटी पार्क भूमि अधिग्रहण मामले में मुआवजे का फैसला पलटा
आईटी पार्क भूमि अधिग्रहण मामला, नैनीताल हाई कोर्ट ने पलटा देहरादून कोर्ट का फैसला

Image: Jagran
नैनीताल हाई कोर्ट ने देहरादून में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक पार्क के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे में वृद्धि को अनुचित ठहराते हुए मूल मुआवजे को बहाल कर दिया। यह मामला ग्राम गुजराड़ा मान सिंह की भूमि से संबंधित है, जहां मुआवजा 34.72 लाख रुपये था।
- 01नैनीताल हाई कोर्ट ने सिडकुल की अपील मंजूर की और मुआवजे में की गई वृद्धि को निरस्त किया।
- 02भूमि अधिग्रहण का मामला ग्राम गुजराड़ा मान सिंह से जुड़ा है।
- 032005 में भूमि स्वामी को 34.72 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया था।
- 04संदर्भ न्यायालय ने मुआवजा बढ़ाकर 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया था।
- 05जस्टिस सिद्धार्थ साह की एकलपीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
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नैनीताल हाई कोर्ट ने सहस्त्रधारा रोड, देहरादून पर आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक पार्क के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे से जुड़े एक विवाद में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कोर्ट ने सिडकुल की अपील को मंजूर करते हुए मुआवजे में की गई भारी वृद्धि को अनुचित ठहराया और मूल पुरस्कार को बहाल कर दिया। यह विवाद ग्राम गुजराड़ा मान सिंह की भूमि के अधिग्रहण से संबंधित था। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) ने वर्ष 2005 में भूमि स्वामी को वैधानिक लाभों सहित लगभग 34.72 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया था। भूमि स्वामी ने इस मुआवजे को अपर्याप्त मानते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। तृतीय अपर जिला न्यायाधीश, देहरादून ने 2010 में मुआवजा बढ़ाकर 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया था। सिडकुल ने इस आदेश को चुनौती दी, तर्क दिया कि भूमि का बाजार मूल्य सर्किल दरों पर आधारित नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने पाया कि संदर्भ न्यायालय ने भूमि को आवासीय मानकर सर्किल दर लागू की थी, जबकि यह भूमि कृषि प्रकृति की थी। इस निर्णय को भूमि अधिग्रहण मामलों में मुआवजा निर्धारण के सिद्धांतों को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
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इस निर्णय से भूमि अधिग्रहण मामलों में मुआवजे का निर्धारण स्पष्ट हुआ है, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों में न्यायालय के निर्णयों पर प्रभाव पड़ेगा।
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