कैसे नीम करौली बाबा की शिक्षाओं ने स्टीव जॉब्स को बनाया एप्पल का शहंशाह
कैंची धाम से मिला वो मंत्र, जिसने स्टीव जॉब्स को बनाया एप्पल का शहंशाह!

Image: Aaj Tak
स्टीव जॉब्स, एप्पल के सह-संस्थापक, ने 1974 में भारत की यात्रा के दौरान नीम करौली बाबा के कैंची धाम आश्रम में महत्वपूर्ण शिक्षाएँ प्राप्त कीं। इस अनुभव ने उनकी सोच और अंतर्ज्ञान को आकार दिया, जो बाद में एप्पल की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 01स्टीव जॉब्स ने 1974 में भारत की यात्रा की, जहां उन्होंने नीम करौली बाबा के आश्रम में समय बिताया।
- 02जॉब्स का मानना था कि भारत के लोग अपने अंतर्ज्ञान पर अधिक भरोसा करते हैं, जो उनके लिए प्रेरणादायक था।
- 03उन्होंने 'Autobiography of a Yogi' पढ़ी, जो उनके आध्यात्मिक विकास में सहायक रही।
- 04सादगी और अंतर्ज्ञान की सीख ने एप्पल के डिजाइन और जॉब्स की लीडरशिप स्टाइल को प्रभावित किया।
- 05जॉब्स ने 1300 डॉलर से एप्पल की नींव अपने घर के गैरेज में रखी।
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स्टीव जॉब्स, एप्पल के सह-संस्थापक, ने 19 साल की उम्र में भारत की यात्रा की, जहां उन्होंने नीम करौली बाबा के कैंची धाम आश्रम में महत्वपूर्ण शिक्षाएँ प्राप्त कीं। यह यात्रा उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। जॉब्स ने भारत में लगभग 7 महीने बिताए, जहाँ उन्होंने विभिन्न धार्मिक स्थानों की यात्रा की और अंतर्ज्ञान पर विश्वास किया। उनका मानना था कि भारतीय संस्कृति ने उन्हें सादगी और भावनात्मक समझ सिखाई, जो उनके काम और नेतृत्व में स्पष्ट रूप से दिखाई दी। 1 अप्रैल 1976 को, जॉब्स ने अपने दोस्त स्टीव वॉजनियाक के साथ मिलकर एप्पल की स्थापना की, जो आज दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक है। जॉब्स का कहना था कि उनकी भारत यात्रा ने उन्हें अपने जीवन का असली मकसद समझने में मदद की।
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