दिल्ली हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: बरी हुए व्यक्तियों की पहचान अब इंटरनेट पर नहीं दिखेगी
दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: कोर्ट केस से बरी हुए लोगों का नाम अब इंटरनेट पर नहीं दिखेगा

Image: Business Standard
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि बरी किए गए व्यक्तियों का नाम और पहचान अब इंटरनेट पर नहीं दिखेगी। यह निर्णय 'भूल जाने के अधिकार' को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का हिस्सा मानता है, जिससे नागरिकों को व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा मिलेगी।
- 01दिल्ली उच्च न्यायालय ने बरी हुए व्यक्तियों की पहचान को इंटरनेट पर प्रदर्शित न करने का आदेश दिया है।
- 02न्यायालय ने 'भूल जाने का अधिकार' को निजता के अधिकार का हिस्सा माना है।
- 03जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि डिजिटल युग में निजता के अधिकारों को विकसित होना चाहिए।
- 04महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों में 'डी-इंडेक्स' करना उपयुक्त नहीं होगा।
- 05याचिकाओं में बरी हुए व्यक्तियों ने ऑनलाइन सामग्री को हटाने की मांग की थी, जिससे उनके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि किसी आरोपी के बरी होने या आरोपमुक्त होने के मामलों में उनकी पहचान और नाम अब इंटरनेट पर नहीं दिखेंगे। न्यायालय ने यह फैसला 'भूल जाने के अधिकार' के तहत निजता के अधिकार को मान्यता देते हुए सुनाया। जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि डिजिटल युग में निजता के अधिकारों को विकसित होना चाहिए, ताकि लोग अपनी पुरानी जानकारी को मिटा सकें। अदालत ने विभिन्न सर्च इंजनों और कानूनी डेटाबेस को निर्देश दिया कि वे बरी हुए व्यक्तियों के मामलों से संबंधित नाम-आधारित खोज को निष्क्रिय करें। हालांकि, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों में 'डी-इंडेक्स' करना उचित नहीं होगा। यह निर्णय उन याचिकाओं पर आया है, जिनमें बरी हुए व्यक्तियों ने ऑनलाइन सामग्री को हटाने की मांग की थी, जिससे उनके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।
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यह निर्णय नागरिकों को उनकी व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा प्रदान करेगा, जिससे उनकी गरिमा और स्वायत्तता बनी रहेगी।
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