सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: वेश्यावृत्ति को कोठा नहीं माना जाएगा यदि कोई महिला अकेले अपनी आजीविका के लिए करती है
'कोई महिला आजीविका के लिए वेश्यावृत्ति करे, तो वह जगह कोठा नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने दिया 298 पन्नों का फैसला

Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट ने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम पर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि यदि कोई महिला अकेले अपने घर में वेश्यावृत्ति करती है, तो उसे वेश्यागृह नहीं माना जाएगा। यह फैसला 70 साल पुराने कानून के उद्देश्य को स्पष्ट करता है कि इसका लक्ष्य वेश्यावृत्ति को पूरी तरह से समाप्त करना नहीं है।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने 70 साल पुराने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम का गहन विश्लेषण किया है।
- 02अदालत ने कहा कि वेश्यावृत्ति का पूरी तरह से अपराध बनाना इस अधिनियम का उद्देश्य नहीं है।
- 03अगर कोई महिला अकेले अपने घर में वेश्यावृत्ति करती है, तो उसे वेश्यागृह नहीं माना जाएगा।
- 04अधिनियम की धारा 7 और 8 सार्वजनिक स्थानों पर वेश्यावृत्ति को दंडित करती हैं।
- 05कोर्ट ने कहा कि वेश्यावृत्ति के सभी कृत्यों की निंदा करना विधायी उद्देश्य नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट ने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (ITPA) पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि वेश्यावृत्ति को पूरी तरह से अपराध घोषित करने का उद्देश्य नहीं है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि इस कानून का असली मकसद वेश्यावृत्ति के व्यावसायीकरण को रोकना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला अकेले अपने घर में वेश्यावृत्ति करती है, तो उसे वेश्यागृह नहीं माना जाएगा, बशर्ते इसमें कोई अन्य महिला या बिचौलिए की भूमिका न हो। इसके अलावा, अधिनियम की धारा 7 और 8 सार्वजनिक स्थानों पर वेश्यावृत्ति को दंडित करती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि वेश्यावृत्ति के सभी कृत्यों की निंदा करना इस अधिनियम का उद्देश्य नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक शालीनता और सामाजिक नैतिकता का पालन हो।
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यह फैसला वेश्यावृत्ति से जुड़े कानूनी मामलों में स्पष्टता लाता है और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करता है।
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