दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने 'जायबर' एप से रील्स की लत को खत्म करने की पहल की
क्या है ‘जायबर’ एप, जो रील्स की लत और तनाव से DU के छात्रों को करेगा दूर
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Image: Jagran
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने 'जायबर' नामक एआई-आधारित एप विकसित किया है, जो वर्चुअल स्क्रोलिंग की आदत को बदलकर वास्तविक संवाद को बढ़ावा देता है। यह एप छात्रों को एक-दूसरे से बातचीत करने के लिए प्रेरित करता है और 14 प्रमुख कॉलेजों में 300 छात्रों द्वारा उपयोग किया जा रहा है।
- 01'जायबर' एप छात्रों को वास्तविक संवाद की ओर ले जाने का प्रयास कर रहा है।
- 02यह एप बिना विज्ञापनों और रील्स के डिजाइन किया गया है।
- 03यूजर को फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने पर तुरंत बातचीत करनी होती है।
- 04एप का एआई-आधारित रियल-टाइम मैचिंग सिस्टम छात्रों को जोड़ता है।
- 05इस एप का उपयोग 14 प्रमुख कॉलेजों के 300 छात्रों द्वारा किया जा रहा है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने 'जायबर' नामक एआई-आधारित एप विकसित किया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को वर्चुअल स्क्रोलिंग से निकालकर वास्तविक संवाद की ओर ले जाना है। यह एप बिना विज्ञापनों और रील्स के डिजाइन किया गया है, जिससे छात्रों का ध्यान सीधे बातचीत पर केंद्रित रहता है। जब कोई यूजर फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करता है, तो उसे तुरंत बातचीत करनी होती है, अन्यथा रिक्वेस्ट स्वतः हट जाती है। इस एप का एआई-आधारित रियल-टाइम मैचिंग सिस्टम समान रुचियों और बैकग्राउंड के आधार पर छात्रों को जोड़ता है। वर्तमान में, 14 प्रमुख कॉलेजों के 300 छात्र इस एप का उपयोग कर रहे हैं, और इसे रविवार से प्ले स्टोर पर उपलब्ध कराया जाएगा। छात्रों का अनुभव सकारात्मक है, और एप में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं।
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'जायबर' एप छात्रों को सोशल मीडिया से दूर करके वास्तविक संवाद को बढ़ावा देगा, जिससे उनकी मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।
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