अमेरिका ने भारत और चीन पर नए टैरिफ लागू करने की योजना बनाई
कोर्ट से हार के बाद अमेरिका ने फिर शुरू किया टैरिफ वॉर, भारत-चीन निशाने पर

Image: Aaj Tak
अमेरिका ने 60 देशों पर जबरन श्रम से बने सामानों पर 10-12.5% अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें भारत और चीन शामिल हैं। यह निर्णय फरवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले के शुल्कों को रद्द करने के बाद लिया गया है। इससे भारत के श्रम-प्रधान निर्यात को नुकसान हो सकता है।
- 01अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि सभा ने 60 देशों पर 10-12.5% अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है।
- 02भारत और चीन को उच्चतम 12.5% शुल्क का सामना करना पड़ेगा, जबकि बांग्लादेश और पाकिस्तान को कम दर मिलेगी।
- 03इस प्रस्ताव के तहत 1,654 उत्पाद श्रेणियों को छूट दी गई है, लेकिन भारत के श्रम-प्रधान निर्यात पर कोई छूट नहीं है।
- 04अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच की अगुवाई में एक व्यापार दल नई दिल्ली में वार्ता कर रहा है।
- 05अगर वार्ता विफल होती है, तो भारतीय सामानों पर नया शुल्क लागू होगा, जिससे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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अमेरिका ने 2 जून को 60 देशों पर जबरन श्रम से बने सामानों पर 10-12.5% अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह निर्णय फरवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले के शुल्कों को रद्द करने के बाद लिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, भारत और चीन को 12.5% शुल्क का सामना करना पड़ेगा, जबकि बांग्लादेश और पाकिस्तान को कम दर मिलेगी। इस प्रस्ताव में 1,654 उत्पाद श्रेणियों को छूट दी गई है, लेकिन भारत के श्रम-प्रधान निर्यात जैसे वस्त्र, गारमेंट्स और जूते पर कोई छूट नहीं है, जिससे इन क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिका का एक व्यापार दल नई दिल्ली में वार्ता कर रहा है, जो संभावित रूप से भारत के लिए कम दर की दिशा में सहायक हो सकता है। यदि वार्ता सफल नहीं होती है, तो भारतीय सामानों पर नया शुल्क लागू होगा।
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भारत के श्रम-प्रधान निर्यात पर नए शुल्कों का प्रभाव पड़ सकता है, जिससे उद्योगों में आर्थिक नुकसान हो सकता है।
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