पश्चिम एशिया संकट का लिकर इंडस्ट्री पर प्रभाव: मार्जिन और ग्रोथ में कमी
पश्चिम एशिया संकट से लिकर इंडस्ट्री पर मार, मार्जिन और ग्रोथ दोनों पर दबाव
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पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संकट के कारण भारतीय लिकर इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे EBITDA मार्जिन में 150-200 बेसिस पॉइंट की गिरावट और रेवेन्यू ग्रोथ में 5-7% की कमी का अनुमान है। कांच की बोतलों की कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति में कमी इसका मुख्य कारण हैं।
- 01लिकर इंडस्ट्री के EBITDA मार्जिन में 150-200 बेसिस पॉइंट की गिरावट की संभावना है।
- 02कांच की बोतलों की कीमत 20% बढ़कर 280-300 रुपये प्रति केस तक पहुंचने की उम्मीद है।
- 03रेवेन्यू ग्रोथ 5-7% रहने का अनुमान है, जबकि पिछले तीन वर्षों में यह 11% की वृद्धि दर पर थी।
- 04पैकेजिंग लागत का दो-तिहाई हिस्सा कांच की बोतलों पर खर्च होता है।
- 05कंपनियों की बैलेंस शीट स्वस्थ रहने की संभावना है, ब्याज कवरेज अनुपात 6.8 गुना रहने का अनुमान है।
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पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट का असर भारतीय लिकर इंडस्ट्री पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, इस वित्त वर्ष में लिकर कंपनियों के EBITDA मार्जिन में 150-200 बेसिस पॉइंट की गिरावट की संभावना है, जो 11.5-12% तक पहुंच सकता है। इसका मुख्य कारण कांच की बोतलों की कीमतों में 20% की वृद्धि और आपूर्ति शृंखला में बाधाएं हैं। कांच की बोतलों की कीमतें 280-300 रुपये प्रति केस तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके अलावा, लिकर इंडस्ट्री की रेवेन्यू ग्रोथ 5-7% रहने का अनुमान है, जबकि पिछले तीन वित्त वर्षों में यह 11% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) पर थी। कांच की बोतलों की कमी के कारण पैकेजिंग लागत में वृद्धि हो रही है, जो बीयर सेगमेंट में शुद्ध राजस्व का 35% और स्पिरिट्स में 25% है। हालांकि, कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत बनी हुई है और ब्याज कवरेज अनुपात 6.8 गुना रहने का अनुमान है। आगे की स्थिति संकट की दिशा और कच्चे माल की कीमतों पर निर्भर करेगी।
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लिकर इंडस्ट्री में मार्जिन में कमी और धीमी रेवेन्यू ग्रोथ का मतलब है कि उपभोक्ताओं को कीमतों में वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है।
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