पंचायत के एक्टर विनोद सूर्यवंशी ने साझा किया जातिवाद का अनुभव
पंचायत के इस एक्टर को अपने ही गांव में नहीं है मंदिर में घुसने की इजाजत, फिल्मों में रंग की वजह से हुआ रिजेक्ट
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विनोद सूर्यवंशी, 'पंचायत' के एक्टर, ने अपने गृहनगर कर्नाटक में जातिवाद का सामना करने के अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि सांवले रंग के कारण उन्हें कई बार रिजेक्ट किया गया और गांव में मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है।
- 01विनोद सूर्यवंशी ने जातिवाद का अनुभव साझा किया।
- 02गांव में ऊंची और नीची जातियों के लिए अलग-अलग इलाके हैं।
- 03सांवले रंग के कारण कई बार रिजेक्ट किया गया।
- 04बचपन में परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी।
- 05'पंचायत' शो में उनकी भूमिका ने उन्हें पहचान दिलाई।
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विनोद सूर्यवंशी, जो 'पंचायत' में अपने छोटे से लेकिन प्रभावशाली रोल के लिए जाने जाते हैं, ने हाल ही में अपने गृहनगर कर्नाटक में जातिवाद के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके गांव में ऊंची और नीची जातियों के लिए अलग-अलग इलाके हैं, और दलितों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है। विनोद ने कहा कि उन्हें अपने सांवले रंग के कारण कई बार रिजेक्ट किया गया, यहां तक कि एक भिखारी के रोल के लिए भी। उनका बचपन कठिनाइयों से भरा था, जहां उनके माता-पिता की आर्थिक स्थिति खराब थी। इस अनुभव ने उनके जीवन में हमेशा एक उदासी का एहसास कराया। 'पंचायत' के अलावा, विनोद ने 'थम्मा', 'सत्यमेव जयते', और 'जॉली LLB 3' जैसी फिल्मों में भी भूमिकाएं निभाई हैं।
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इस अनुभव से जातिवाद और सामाजिक भेदभाव के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित होता है, जो समाज में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है।
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