पलाऊ ने चीन के दबाव को खारिज करते हुए ताइवान का समर्थन जारी रखा
18 हजार की आबादी वाले देश ने चीन को दिखाई आंखें, कहा- ताइवान का समर्थन करते रहेंगे

Image: India Tv
पलाऊ, एक छोटे द्वीपीय देश, ने ताइवान के साथ अपने राजनयिक संबंध बनाए रखने की पुष्टि की है, चीन के दबाव के बावजूद। राष्ट्रपति सुरांगेल व्हिप्स जूनियर ने कहा कि उनकी सरकार किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगी और ताइवान का समर्थन करती रहेगी।
- 01पलाऊ की आबादी लगभग 18,000 है और यह ताइवान के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने का निर्णय लिया है।
- 02चीन ने पलाऊ पर ताइवान से संबंध तोड़ने का दबाव बनाया था, जिसे पलाऊ ने ठुकरा दिया।
- 03पलाऊ के राष्ट्रपति ने कहा कि चीन ने पर्यटन क्षेत्र का उपयोग दबाव के लिए किया है।
- 042024 में पलाऊ के सरकारी दस्तावेजों का लीक होना चीन की संभावित भूमिका को दर्शाता है।
- 05पलाऊ का यह रुख छोटे देशों की स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाता है।
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पलाऊ, प्रशांत महासागर में स्थित एक छोटे द्वीपीय देश, ने ताइवान के साथ अपने राजनयिक संबंधों को बनाए रखने का स्पष्ट निर्णय लिया है। राष्ट्रपति सुरांगेल व्हिप्स जूनियर ने कहा है कि उनकी सरकार चीन के आर्थिक, राजनीतिक और साइबर दबाव के आगे नहीं झुकेगी। चीन ने पलाऊ पर ताइवान से संबंध तोड़ने का दबाव डाला था, लेकिन पलाऊ ने इस मांग को ठुकरा दिया। चीन ने पर्यटन क्षेत्र का उपयोग करके भी दबाव बनाने की कोशिश की थी, जब उसने पलाऊ जाने वाले अपने नागरिकों के समूह पर्यटन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अलावा, 2024 में पलाऊ के सरकारी दस्तावेजों के लीक होने में चीन की संभावित भूमिका का आरोप भी लगाया गया है। पलाऊ का यह रुख अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है, और यह संकेत देता है कि छोटे देश भी अपनी विदेश नीति में स्वतंत्रता की कोशिश कर रहे हैं।
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पलाऊ का ताइवान के प्रति समर्थन उसके पर्यटन और आर्थिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
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