गंगा दशहरा 2026: गंगा अवतरण की पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व
गंगा दशहरा 2026: 1 राजा का अहंकार, 1 ऋषि का श्राप और भगीरथ का संकल्प... ऐसी है गंगा अवतरण की कथा, पढ़ें यहां

Image: News 18 Hindi
गंगा दशहरा 2026, 25 मई को मनाया जा रहा है, जब मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुईं। इस दिन भक्तगण गंगा में स्नान कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। गंगा अवतरण की कथा राजा सगर, उनके 60 हजार पुत्रों और भगीरथ की तपस्या से जुड़ी है, जो गंगा को धरती पर लाने के लिए संघर्ष करते हैं।
- 01गंगा दशहरा का पर्व मां गंगा के धरती पर अवतरण का प्रतीक है।
- 02राजा सगर के 60 हजार पुत्रों की मुक्ति के लिए भगीरथ ने कठोर तपस्या की।
- 03गंगा को धरती पर लाने के लिए भगवान शिव ने उनके वेग को नियंत्रित किया।
- 04गंगा का एक नाम 'जह्नवी' ऋषि जह्नु की कथा से जुड़ा है।
- 05गंगा के जल से राजा सगर के पुत्रों को मुक्ति मिली, जिससे गंगा को 'भागीरथी' भी कहा जाता है।
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गंगा दशहरा 2026, 25 मई को पूरे भारत में श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन भक्तगण गंगा घाटों पर एकत्रित होकर स्नान और पूजा करते हैं, क्योंकि यह दिन मां गंगा के धरती पर अवतरण का प्रतीक है। गंगा दशहरा का पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसमें राजा सगर और उनके 60 हजार पुत्रों की पौराणिक कथा भी समाहित है। राजा सगर ने अपने पुत्रों की मुक्ति के लिए अपने पोते भगीरथ को गंगा को स्वर्ग से धरती पर लाने का संकल्प दिलाया। भगीरथ की कठोर तपस्या और भगवान शिव की सहायता से गंगा का वेग नियंत्रित किया गया। गंगा का जल राजा सगर के पुत्रों को मुक्ति दिलाने में सक्षम हुआ। इस दिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और दान का महत्व है, जिससे भक्तगण सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
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गंगा दशहरा के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान और स्नान से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतोष मिलता है।
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