नैनीताल चिड़ियाघर में पहली बार होगी जीन सैंपलिंग, इनब्रीडिंग की समस्या का समाधान
नैनीताल चिड़ियाघर के वन्य जीवों की पहली बार होगी जीन सैंपलिंग, DNA डाटा से रुकेगी इनब्रीडिंग

Image: Jagran
नैनीताल चिड़ियाघर में वन्य जीवों की पहली बार जीन सैंपलिंग की जाएगी, जिसका उद्देश्य आनुवांशिक डाटा तैयार कर इनब्रीडिंग की रोकथाम करना है। पहले चरण में रेड पांडा की जीन सैंपलिंग होगी। यह पहल प्रजातियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण साबित होगी।
- 01चिड़ियाघर में पहली बार जीन सैंपलिंग की जाएगी, जिससे आनुवांशिक डाटा तैयार होगा।
- 02पहले चरण में दार्जिलिंग से लाए गए रेड पांडा की जीन सैंपलिंग की जाएगी।
- 03चिड़ियाघर में 29 प्रजातियों के 200 से अधिक जीव और पक्षी संरक्षित हैं।
- 04इनब्रीडिंग के कारण आनुवांशिक कमजोरी और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
- 05सीसीएमबी हैदराबाद के साथ जीन सैंपलिंग के लिए पत्राचार किया गया है।
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नैनीताल चिड़ियाघर में वन्य जीवों की पहली बार जीन सैंपलिंग की योजना बनाई गई है, जिसका उद्देश्य आनुवांशिक डाटा तैयार कर इनब्रीडिंग की समस्या को रोकना है। चिड़ियाघर में संरक्षित जीवों की जीन सैंपलिंग के पहले चरण में दार्जिलिंग से लाए गए रेड पांडा की जीन सैंपलिंग की जाएगी। वर्तमान में चिड़ियाघर में 29 प्रजातियों के 200 से अधिक जीव और पक्षी संरक्षित हैं। जू प्रबंधन ने बताया कि पहले चरण में छह रेड पांडा की जीन सैंपलिंग की जाएगी, जिससे आनुवांशिक डाटा उपलब्ध होगा। इससे न केवल इनब्रीडिंग की समस्या का समाधान होगा, बल्कि अन्य चिड़ियाघरों के साथ जीवों के आदान-प्रदान में भी मदद मिलेगी। डीएफओ आकाश गंगवार ने बताया कि यह पहल जीवों के संरक्षण में महत्वपूर्ण साबित होगी।
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यह पहल चिड़ियाघर में वन्य जीवों के संरक्षण और आनुवांशिक विविधता को बढ़ाने में मदद करेगी।
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