स्मारकों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर बीएचयू में कार्यशाला
Varanasi News: स्मारकों, सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना जरूरी
Amar Ujala
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बीएचयू के प्राचीन इतिहास विभाग में आयोजित कार्यशाला में उत्तर-मौर्यकालीन मुद्राशास्त्र और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर चर्चा की गई। प्रो. एमपी अहिरवार ने संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रतिभागियों ने भारत कला भवन में प्राचीन सिक्कों का संग्रह देखा और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में भाग लिया।
- 01प्रो. एमपी अहिरवार ने सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
- 02कार्यशाला में उत्तर-मौर्यकालीन मुद्राओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
- 03प्रतिभागियों ने प्राचीन भारतीय मुद्राशास्त्र के महत्व को समझा।
- 04भारत कला भवन में प्राचीन सिक्कों का संग्रह देखा गया।
- 05प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में दीप्ती श्रीवास्तव ने पहला स्थान प्राप्त किया।
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बीएचयू के प्राचीन इतिहास और पुरातत्व विभाग में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें उत्तर-मौर्यकालीन मुद्राशास्त्र और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर चर्चा की गई। विभागाध्यक्ष प्रो. एमपी अहिरवार ने कहा कि स्मारकों और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। इस सात दिवसीय कार्यशाला में प्रतिभागियों ने प्राचीन भारतीय मुद्राओं, उनके स्रोतों, लिपियों और टकसाल तकनीक पर चर्चा की। तीसरे दिन का मुख्य फोकस उत्तर-मौर्यकालीन मुद्राओं पर रहा, जिसमें नगर-निर्गत सिक्के, राजशाही सिक्के और जनजातीय मुद्राएं शामिल थीं। प्रतिभागियों ने भारत कला भवन का भ्रमण किया और यहां रखे कुषाण एवं गुप्तकालीन सिक्कों के संग्रह को देखा। कार्यशाला की संयोजिका प्रो. मीनाक्षी सिंह ने प्रतिभागियों को सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के प्रति जागरूक किया। प्रतियोगिता में दीप्ती श्रीवास्तव ने पहला, सुजीत यादव ने दूसरा और निहारिका सिंह तथा संजना सिंह ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
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इस कार्यशाला से स्थानीय छात्रों और शोधकर्ताओं को प्राचीन भारतीय मुद्राशास्त्र और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के महत्व को समझने में मदद मिलेगी।
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