मार्को रुबियो की भारत यात्रा: ऊर्जा सहयोग और अमेरिकी रणनीति पर सवाल
मार्को रुबियो ने दिल्ली आने से पहले जो कहा क्या वह भारत की उलझन बढ़ाता है?

Image: The Bbc
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत की आगामी यात्रा से पहले कहा कि अमेरिका भारत को अधिक तेल आपूर्ति करने के लिए तैयार है। उनकी टिप्पणियों ने भारत की ऊर्जा नीति और अमेरिका के साथ संबंधों पर सवाल उठाए हैं, खासकर जब वेनेज़ुएला के साथ संभावित सहयोग की चर्चा की गई। विपक्षी नेताओं ने इस पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।
- 01रुबियो ने कहा कि अमेरिका रिकॉर्ड स्तर पर तेल उत्पादन कर रहा है और भारत को तेल निर्यात करने के लिए तैयार है।
- 02जयराम रमेश ने रुबियो की टिप्पणियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री के पास भारतीय विदेश नीति के बारे में पहले से जानकारियाँ हैं।
- 03विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर नियंत्रण चाहता है, जिससे भारत की ऊर्जा नीति पर प्रभाव पड़ेगा।
- 04भारत ने 2022 में भारी मात्रा में रूसी तेल खरीदा, जिससे डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती मिली।
- 05ओपेक के कमजोर होने से अमेरिका को तेल बाजार में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, लेकिन यह भारत के लिए महंगा साबित हो सकता है।
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी भारत यात्रा से पहले कहा है कि अमेरिका भारत को अधिक तेल आपूर्ति करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका वेनेज़ुएला के साथ सहयोग के अवसरों की तलाश कर रहा है, जिसमें वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की संभावित यात्रा शामिल है। इस पर भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाए हैं, यह पूछते हुए कि क्या रुबियो के पास भारतीय विदेश नीति के बारे में अन्य जानकारियाँ भी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों पर नियंत्रण चाहता है, जो भारत के लिए रणनीतिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है। भारत ने हाल के वर्षों में रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदा है, जिससे डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती मिली है। इसके अलावा, ओपेक के कमजोर होने से अमेरिका को तेल बाजार में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, लेकिन यह भारत के लिए महंगा साबित हो सकता है।
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भारत की ऊर्जा नीति और आपूर्ति श्रृंखला पर अमेरिकी नियंत्रण का बढ़ता दबाव भारतीय उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए महंगा साबित हो सकता है।
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