रूस-चीन सैन्य सहयोग से भारत की सुरक्षा पर खतरे के संकेत
रूस-चीन का मेगा मिलिट्री प्लान, पुतिन के मिलिट्री बेस का सर्वे करने पहुंची चीनी सेना, भारत पर असर जानें
Image: Nbt Navbharattimes
रूस और चीन के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों ने भारत की चिंता को बढ़ा दिया है। हाल ही में चीनी सेना ने रूस के सैन्य ठिकानों का दौरा किया, जिससे भारत के लिए सुरक्षा चिंताएँ उत्पन्न हो रही हैं। भारत की सैन्य आपूर्ति का बड़ा हिस्सा रूस पर निर्भर है, जो एक संभावित खतरा बन सकता है।
- 01चीनी सेना ने रूस के पूर्वी सैन्य जिले में कई ठिकानों का दौरा किया, जिसमें एयर डिफेंस मिसाइल यूनिट शामिल थी।
- 02रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन और रूस के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग को प्राकृतिक साझेदारी बताया।
- 03भारत की सेना के लगभग 50% से 90% सैन्य उपकरण रूस से आते हैं, जो भारत के लिए एक सुरक्षा चिंता का विषय है।
- 04चीनी प्रतिनिधिमंडल ने रूस के सैन्य तंत्र की पारदर्शिता और सहयोग की सराहना की।
- 05रूस-चीन सैन्य सहयोग में पिछले दशक में नियमित संयुक्त अभ्यास और रणनीतिक गश्त शामिल हैं।
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रूस और चीन के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों ने भारत के लिए सुरक्षा चिंताएँ उत्पन्न की हैं। हाल ही में, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की एक टीम ने रूस के पूर्वी सैन्य जिले में कई ठिकानों का दौरा किया, जिसमें एयर डिफेंस मिसाइल यूनिट भी शामिल थी। यह दौरा 'भरोसा बढ़ाने वाले तंत्र' के तहत किया गया था, जिसे 1996 और 1997 में स्थापित किया गया था। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस सहयोग को प्राकृतिक साझेदारी बताया। चीनी प्रतिनिधिमंडल ने रूस के सैन्य तंत्र की प्रभावशीलता की सराहना की। भारत की सैन्य आपूर्ति का लगभग 50% से 90% हिस्सा रूस पर निर्भर है, जिससे यह चिंता बढ़ती है कि चीन इन सिस्टमों की कमजोरियों का पता लगा सकता है। इसके अलावा, किसी भी संघर्ष की स्थिति में रूस तटस्थता अपनाने की संभावना है, जिससे भारत को आवश्यक सैन्य साजोसामान की आपूर्ति में समस्या आ सकती है।
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भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है यदि चीन रूस के सैन्य उपकरणों की कमजोरियों का पता लगाता है।
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