हिजबुल कमांडर से 20 लाख रुपये की फंडिंग: एनआईए ने जमानत नामंजूर की
AK-47, पिस्तौल और ग्रेनेड सप्लाई का आरोप: हिजबुल कमांडर से मिले थे 20 लाख, आतंकी फंडिंग केस में जमानत नामंजूर
Amar Ujala
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एनआईए की विशेष अदालत ने हिजबुल मुजाहिदीन के मददगार शाहीन अहमद लोन की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। उन पर पाकिस्तान से हथियारों की तस्करी और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप है, जिसमें 20 लाख रुपये की फंडिंग शामिल है।
- 01एनआईए ने शाहीन अहमद लोन की जमानत याचिका खारिज की।
- 02आरोप है कि लोन ने पाकिस्तान से हथियारों की तस्करी की।
- 03हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर से 20 लाख रुपये की फंडिंग मिली।
- 04जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप।
- 05एनआईए ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत को अस्वीकार किया।
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एनआईए मामलों की विशेष अदालत ने हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-ताइबा के मददगार शाहीन अहमद लोन की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान से हथियारों की तस्करी की। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में जमानत नियम है और जेल अपवाद का सामान्य सिद्धांत लागू नहीं होता। मामले की शुरुआत 11 जनवरी, 2020 को हुई थी, जब श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर एक कार से एके-47 राइफल, तीन पिस्तौल और एक हैंड ग्रेनेड बरामद हुए थे। एनआईए का आरोप है कि लोन को हिजबुल के तत्कालीन जिला कमांडर से 20 लाख रुपये मिले थे, जिनका उपयोग उसने लश्कर के आतंकियों को हथियार मुहैया कराने में किया।
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इस मामले से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई को मजबूती मिलेगी।
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