बंगाल चुनाव में सायनी घोष का 'काबा-मदीना' गाना और राजनीतिक विवाद
बंगाल चुनाव में 'काबा-मदीना' गाने पर क्यों हो रहा है विवाद, राजनीति में कैसे आईं सायनी घोष
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पश्चिम बंगाल के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायनी घोष का गाया लोकगीत 'हृदय मा छे काबा, नयने मदीना' विवाद का कारण बन गया है। बीजेपी नेता इसे सांप्रदायिक बताते हुए आलोचना कर रहे हैं, जबकि घोष ने इसे अल्पसंख्यक वोटों को आकर्षित करने के लिए गाया है।
- 01सायनी घोष का लोकगीत 'हृदय मा छे काबा, नयने मदीना' चुनावी सभाओं में गाया जा रहा है।
- 02बीजेपी नेता इस गाने को सांप्रदायिक बताते हुए आलोचना कर रहे हैं।
- 03सायनी घोष ने 2021 में विधानसभा चुनाव में हारने के बाद भी राजनीतिक प्रभाव बढ़ाया।
- 04उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में कोलकाता के जादवपुर सीट से उम्मीदवार बनाया गया था।
- 05महिलाओं के मुद्दों पर बंगाल चुनाव में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने हैं।
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पश्चिम बंगाल के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायनी घोष द्वारा गाया गया लोकगीत 'हृदय मा छे काबा, नयने मदीना' विवाद का कारण बन गया है। यह गाना बांग्लादेश के कवि अब्दुल रहमान बोयाती द्वारा लिखा गया है और इसे घोष अपनी चुनावी जनसभाओं में गा रही हैं। बीजेपी नेता इस गाने को सांप्रदायिक बताते हुए आलोचना कर रहे हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह शामिल हैं। सायनी घोष ने 2021 में विधानसभा चुनाव में हारने के बाद भी अपनी लोकप्रियता बढ़ाई और 2024 के लोकसभा चुनाव में कोलकाता के जादवपुर सीट से बीजेपी के उम्मीदवार को हराया। उनके भाषण और चुनावी प्रचार में महिलाओं की भागीदारी को लेकर भी चर्चा हो रही है। आगामी विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित होंगे।
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इस गाने के जरिए सायनी घोष अल्पसंख्यक वोटों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही हैं, जो चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
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