भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के झंडे का इतिहास और डिजाइन
कांग्रेस का झंडा किसने डिजाइन किया था, जिसे 31 मई 1921 को गांधी जी की मंजूरी से किया गया स्वीकार
Image: Nbt Navbharattimes
31 मई 1921 को महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के झंडे को स्वीकृत किया, जिसे स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने डिजाइन किया था। झंडे में लाल और हरे रंग की पट्टियों के साथ सफेद पट्टी और चरखा शामिल किया गया, जो भारत की विविधता और एकता का प्रतीक है।
- 01पिंगली वेंकैया ने 1921 में कांग्रेस के झंडे का मूल डिजाइन तैयार किया, जिसमें लाल और हरा रंग हिंदू और मुस्लिम समुदायों का प्रतिनिधित्व करता है।
- 02गांधी जी ने झंडे में सफेद पट्टी और चरखा जोड़ने का सुझाव दिया, जो स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बन गया।
- 03कांग्रेस का झंडा 1906 में एक हरे झंडे के साथ शुरू हुआ, जिसमें आठ सफेद कमल थे, जो भारत के आठ प्रांतों का प्रतिनिधित्व करते थे।
- 041931 में, कांग्रेस ने चरखे वाले तिरंगे को अपना मुख्य प्रतीक बनाया, जो अब भी पार्टी की गतिविधियों में उपयोग होता है।
- 05भारत के राष्ट्रीय झंडे में आज अशोक चक्र है, लेकिन कांग्रेस का झंडा स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का प्रतीक बना हुआ है।
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का झंडा 31 मई 1921 को महात्मा गांधी द्वारा स्वीकृत किया गया था। इसे स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने डिजाइन किया, जिसमें लाल और हरे रंग की पट्टियों को शामिल किया गया था, जो हिंदू और मुस्लिम समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं। गांधी जी ने झंडे में एक सफेद पट्टी और चरखा जोड़ने का सुझाव दिया, जिससे यह भारत की विविधता और एकता का प्रतीक बन गया। कांग्रेस का झंडा 1885 में पार्टी की स्थापना से जुड़ा है, लेकिन इसका पहला ज्ञात रूप 1906 में सामने आया। 20वीं सदी के प्रारंभ में, झंडे में कई बदलाव हुए, और 1931 में चरखे वाले तिरंगे को मुख्य प्रतीक के रूप में अपनाया गया। आजादी के बाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का झंडा आज भी पार्टी की गतिविधियों में महत्वपूर्ण है, जबकि भारत का राष्ट्रीय झंडा अब अशोक चक्र के साथ है।
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