हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: गिरफ्तारी का समय अब वास्तविक हिरासत से तय होगा
Highcourt: पुलिस ने रोका तो वहीं से मानी जाएगी गिरफ्तारी, 24 घंटे की सीमा कागज नहीं, वास्तविक हिरासत से तय
Amar Ujala
Image: Amar Ujala
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि पुलिस किसी व्यक्ति की आवाजाही रोकती है, तो उसे तुरंत गिरफ्तार माना जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की 24 घंटे की समयसीमा इसी समय से शुरू होगी, न कि कागजों पर दर्ज गिरफ्तारी के समय से।
- 01पुलिस द्वारा आवाजाही रोकने पर व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार माना जाएगा।
- 0224 घंटे की संवैधानिक समयसीमा अब वास्तविक हिरासत से तय होगी।
- 03गिरफ्तारी का समय कागजों पर नहीं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
- 04जस्टिस सुमित गोयल ने संविधान के उल्लंघन के आधार पर रिहाई के आदेश दिए।
- 05जांच एजेंसियां गिरफ्तारी को टालने के लिए शब्दों का उपयोग नहीं कर सकतीं।
Advertisement
In-Article Ad
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि जब पुलिस किसी व्यक्ति की आवाजाही रोकती है, तो उसे उसी समय से गिरफ्तार माना जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की 24 घंटे की संवैधानिक समयसीमा भी उसी क्षण से शुरू होगी। यह मामला अमृतसर में ट्रामाडोल टैबलेट की बरामदगी से संबंधित जांच से जुड़ा है। याचिकाकर्ता को 31 अक्टूबर 2025 की रात को देहरादून से पुलिस ने हिरासत में लिया, लेकिन उसकी औपचारिक गिरफ्तारी 1 नवंबर को दर्ज की गई। जस्टिस सुमित गोयल ने पाया कि याचिकाकर्ता को बिना न्यायिक अनुमति के 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया, जो संविधान का उल्लंघन है। अदालत ने निर्देश दिया कि मजिस्ट्रेट केवल दस्तावेजों पर निर्भर न रहें, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गिरफ्तारी का समय तय करें।
Advertisement
In-Article Ad
इस निर्णय से पुलिस की कार्यप्रणाली में बदलाव आएगा और व्यक्तियों की स्वतंत्रता की रक्षा होगी।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि यह निर्णय पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार लाएगा?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।




