मध्य प्रदेश में रिश्वतखोरी का मामला: लोकायुक्त ने सीनियर क्लर्क को रंगे हाथ पकड़ा
सिस्टम शर्मसार! जिस दफ्तर में की 4 साल नौकरी, उसी के बाबू ने वेतनवृद्धि के लिए मांग ली ₹7000 की रिश्वत

Image: Rewanewsmedia.com
मध्य प्रदेश के रीवा में लोकायुक्त ने जनजातीय कार्य विभाग के सीनियर क्लर्क मुन्नालाल वर्मा को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। उन्होंने एक भृत्य से ₹7,000 की रिश्वत मांगी थी। यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ की गई एक सख्त कार्रवाई का हिस्सा है, जो सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ है।
- 01भृत्य श्रवण तिवारी ने वेतनवृद्धि और एरियर के लिए रिश्वत मांगने की शिकायत की थी।
- 02बाबू मुन्नालाल वर्मा ने ₹7,000 की मांग की, लेकिन मोलभाव के बाद राशि ₹5,000 तय हुई।
- 03लोकायुक्त टीम ने गुप्त रिकॉर्डिंग के जरिए रिश्वत मांगने का प्रमाण जुटाया।
- 04आरोपी बाबू को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया।
- 05इस कार्रवाई ने सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश दिया है।
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मध्य प्रदेश के रीवा जिले में लोकायुक्त ने जनजातीय कार्य विभाग के सीनियर क्लर्क मुन्नालाल वर्मा को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए पकड़ा। आरोपी ने भृत्य श्रवण तिवारी से वेतनवृद्धि और एरियर के भुगतान के लिए ₹7,000 की रिश्वत मांगी। जब तिवारी ने रिश्वत देने से मना किया, तो उन्होंने लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की। लोकायुक्त की टीम ने शिकायत की सत्यता की जांच की और गुप्त रिकॉर्डिंग के माध्यम से यह साबित किया कि वर्मा वास्तव में रिश्वत मांग रहे थे। अंततः तिवारी ने ₹5,000 की राशि बाबू को दी, जिसे वर्मा ने स्वीकार किया, और इस पर लोकायुक्त ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई का नेतृत्व निरीक्षक एस. राम मरावी और निरीक्षक संदीप भदौरिया ने किया। यह मामला सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है, जो दर्शाता है कि भ्रष्ट अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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इस कार्रवाई से रीवा जिले के सरकारी कर्मचारियों में रिश्वतखोरी के खिलाफ एक सख्त संदेश गया है।
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