छत्तीसगढ़ के स्कूल ने स्थानीय बोली बोलने पर बच्चे को किया एडमिशन से इनकार
'इस बच्चे की भाषा बड़े घर के लड़के सीख जाएंगे', स्थानीय बोली में जवाब देने पर स्कूल ने नहीं दिया एडमिशन, DEO का एक्शन
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक स्कूल ने चार साल के बच्चे को सरगुजिहा बोली में जवाब देने पर एडमिशन देने से मना कर दिया। शिकायत पर जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और जांच के आदेश दिए।
- 01स्कूल ने सरगुजिहा बोली बोलने पर बच्चे को एडमिशन से मना किया।
- 02जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
- 03स्कूल बिना मान्यता के संचालित हो रहा था।
- 04कांग्रेस नेता ने ऐसे स्कूलों को बंद करने की मांग की।
- 05बच्चे को एक अन्य प्राइवेट स्कूल में मुफ्त में एडमिशन मिला।
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छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक प्री प्राइमरी स्कूल ने चार साल के बच्चे सत्यम को सरगुजिहा बोली में जवाब देने पर एडमिशन से मना कर दिया। स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा कि वहां बड़े घरों के बच्चे पढ़ते हैं और वे बच्चे की भाषा सीख जाएंगे। इस पर बच्चे के पेरेंट्स ने कलेक्टर अजीत वसंत से शिकायत की। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने मामले की जांच की और स्कूल पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जांच में यह भी पता चला कि स्कूल बिना मान्यता के चल रहा था। पूर्व डेप्युटी सीएम टीएस सिंहदेव ने ऐसे स्कूलों को बंद करने की मांग की है। इस विवाद के बीच, बच्चे को एक अन्य प्राइवेट स्कूल ने मुफ्त में एडमिशन दिया।
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यह मामला शिक्षा प्रणाली में स्थानीय भाषाओं के प्रति संवेदनशीलता और समावेशिता की आवश्यकता को उजागर करता है।
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