महिला आरक्षण पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के मुख्य बिंदु
Explained: परिसीमन, कोटा और सीटों का फार्मूला... महिला आरक्षण पर टकराव के 5 प्वाइंट, आखिर क्या चाहता है विपक्ष
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केंद्र सरकार 2029 लोकसभा चुनाव से पहले संसद और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है। विपक्ष ने इस पर कई आपत्तियां उठाई हैं, जैसे कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन और OBC महिलाओं के लिए आरक्षण का अभाव।
- 01सरकार 2029 लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है।
- 02विपक्ष ने 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने पर आपत्ति जताई है।
- 03अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए महिला आरक्षण में कोई प्रावधान नहीं है।
- 04दक्षिण भारत के राज्यों को आबादी के आधार पर सीटों में कमी का डर है।
- 05सरकार का तर्क है कि परिसीमन के बिना महिला आरक्षण लागू करना संभव नहीं है।
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केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले संसद और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन से जुड़े तीन विधेयक संसद में पेश किए जाएंगे। इनमें से पहला संविधान संशोधन विधेयक है, जिसमें लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना है। हालांकि, विपक्ष ने कई आपत्तियां उठाई हैं, जैसे कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का निर्णय और OBC महिलाओं के लिए आरक्षण का अभाव। विपक्ष का कहना है कि यह कदम दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम कर सकता है। सरकार का तर्क है कि बिना परिसीमन के यह तय करना असंभव है कि कौन सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
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महिला आरक्षण का लागू होना महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाएगा, लेकिन इससे कुछ राज्यों को सीटों में कमी का सामना करना पड़ सकता है।
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