त्रिशाला दत्त ने साझा किया बचपन का दर्द और संघर्ष
मां को खोया-रेसिज्म झेला, वजन पर त्रिशाला ने सुने ताने, छलका दर्द

Image: Aaj Tak
त्रिशाला दत्त, संजय दत्त की बेटी, ने न्यूयॉर्क में अपने जीवन और संघर्षों के बारे में बात की। उन्होंने बचपन में रेसिज्म और बुलिंग का सामना किया और मां की मृत्यु के बाद अकेलेपन का अनुभव किया। आज वे एक लाइसेंस प्राप्त परिवार चिकित्सक हैं, जो दूसरों को उनके संघर्षों में समर्थन देने का प्रयास कर रही हैं।
- 01त्रिशाला दत्त ने 5-6 साल की उम्र में रेसिज्म का सामना किया और स्कूल में वजन को लेकर ताने सुने।
- 02उनकी मां, ऋचा शर्मा, का 1996 में ब्रेन कैंसर के कारण निधन हो गया था, जब त्रिशाला की उम्र केवल 8 साल थी।
- 03त्रिशाला ने बताया कि बचपन में उन्हें अपने दर्द को साझा करने के लिए कोई नहीं था।
- 04उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर थेरेपिस्ट बनने का निर्णय लिया ताकि वे दूसरों को उनके संघर्ष में मदद कर सकें।
- 05त्रिशाला न्यूयॉर्क में एक लाइसेंस प्राप्त मैरिज और फैमिली थेरेपिस्ट (LMFT) और साइकोथेरेपिस्ट हैं।
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त्रिशाला दत्त, संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी ऋचा शर्मा की बेटी, न्यूयॉर्क में अपने जीवन के संघर्षों के बारे में खुलकर बात कर रही हैं। उन्होंने बताया कि कैसे बचपन में रेसिज्म और बुलिंग का सामना करना पड़ा। त्रिशाला ने याद किया कि 5-6 साल की उम्र में उन्हें ताने सुनने को मिले, खासकर जब वे अपने भारतीय मूल के कारण निशाना बनीं। उनकी मां का निधन 1996 में ब्रेन कैंसर के कारण हुआ था, जब त्रिशाला केवल 8 साल की थीं। इस कठिन समय में उन्हें अपने दर्द को साझा करने के लिए कोई नहीं मिला। त्रिशाला ने कहा, "मैंने अपनी जिंदगी में ढेर सारे तूफानों का सामना किया है।" आज, वे एक लाइसेंस प्राप्त मैरिज और फैमिली थेरेपिस्ट (LMFT) और साइकोथेरेपिस्ट हैं, जो दूसरों को उनके संघर्षों में मदद करने का प्रयास कर रही हैं।
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त्रिशाला का अनुभव और उनके चिकित्सकीय करियर दूसरों को मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर खुलकर बात करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
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