भारत और यूएई के बीच एलपीजी और तेल भंडार पर महत्वपूर्ण समझौते
भारत-यूएई के बीच एलपीजी और रणनीतिक तेल भंडार पर बड़े समझौते संभव
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का दौरा करेंगे, जहां तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और रणनीतिक तेल भंडार पर दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह दौरा भारत-यूएई ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच।
- 01प्रधानमंत्री मोदी का यूएई दौरा 2024 में भारत-यूएई ऊर्जा संबंधों को मजबूत करेगा।
- 02यूएई भारत का पहला साझेदार देश है जो आपातकालीन पेट्रोलियम भंडार में शामिल है।
- 03भारत हरित ऊर्जा और ब्लू इकॉनमी से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर करेगा।
- 04मोदी का यह दौरा नॉर्वे, नीदरलैंड, स्वीडन और इटली में भी जारी रहेगा।
- 05यूएई भारत का चौथा सबसे बड़ा कच्चे तेल का स्रोत है, जो 11 प्रतिशत जरूरतों को पूरा करता है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दौरे पर रहेंगे, जहां तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और आपातकालीन या रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। यूएई, भारत के आपातकालीन पेट्रोलियम भंडार में पहला साझेदार देश है, जिसने 2018 में इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) के साथ एक समझौता किया था। इस दौरे के दौरान मोदी हरित ऊर्जा और महासागरीय आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी तकनीक पर भी कई समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे। यह दौरा पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के समय हो रहा है। पिछले महीने भारत के विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने भी यूएई का दौरा किया था। यूएई भारत का चौथा सबसे बड़ा कच्चे तेल का स्रोत है, जो देश की जरूरतों का लगभग 11 प्रतिशत पूरा करता है।
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इस दौरे से भारत-यूएई के बीच ऊर्जा संबंध मजबूत होंगे, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा में सुधार होगा।
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