अल-नीनो का खतरा: 2026 में बढ़ सकती है गर्मी, 149 साल पहले की स्थिति की याद दिलाता है
प्रचंड गर्मी ने पैदा किया 149 साल पहले आए 'मेगा अल नीनो' का खौफ, 4% आबादी का हो गया था सफाया
Aaj Tak
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वैज्ञानिकों का कहना है कि 2026-27 में अल-नीनो की स्थिति 1877 के सबसे विनाशकारी अल-नीनो से भी अधिक गंभीर हो सकती है। इस बार, प्रशांत महासागर में गर्मी की लहरें और जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि का खतरा है, जिससे भारत समेत कई देशों में सूखा और गर्मी बढ़ सकती है।
- 01अल-नीनो 2026-27 में 1877 के सबसे विनाशकारी अल-नीनो से ज्यादा गंभीर हो सकता है।
- 02प्रशांत महासागर में 8046 किमी लंबी गर्मी की लहर से मौसम के पैटर्न में बदलाव हो रहा है।
- 03भारत में तापमान में वृद्धि और मानसून में कमी का खतरा है।
- 04सूखा प्रबंधन और फसल बीमा पर जोर देने की आवश्यकता है।
- 05स्वास्थ्य विभाग को हीट वेव अलर्ट जारी करने की सलाह दी गई है।
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वैज्ञानिकों के अनुसार, 2026-27 में अल-नीनो की स्थिति 1877 के सबसे विनाशकारी अल-नीनो से भी अधिक गंभीर हो सकती है। उस समय, अल-नीनो ने पूरी दुनिया में गर्मी की लहरें, सूखा और महामारी फैला कर पृथ्वी की 4% आबादी को प्रभावित किया था। वर्तमान में, प्रशांत महासागर में 8046 किमी लंबी गर्मी की लहर फैली हुई है, जिसे 'द ब्लॉब' कहा जा रहा है। यह समुद्री सतह के तापमान को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रही है, जिससे मौसम के पैटर्न में बदलाव आ रहा है। भारत में, अल-नीनो के कारण तापमान में वृद्धि और मानसून में कमी का खतरा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति कृषि पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इस संदर्भ में, सरकार और लोगों को पानी की बचत, सूखा प्रबंधन और फसल बीमा पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
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अल-नीनो के कारण भारत में तापमान में वृद्धि और मानसून में कमी का खतरा है, जिससे कृषि प्रभावित होगी और सूखा पड़ सकता है।
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