क्या भारत बन सकता है मध्य पूर्व में शांति का दूत?
क्या मिडिल ईस्ट में 'शांतिदूत' बनेगा भारत? राजनाथ के संकेत के बाद विदेश मंत्रालय ने क्या कहा जान लीजिए
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भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच वैश्विक शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संकेत के बाद, विदेश मंत्रालय ने भारत की मध्यस्थता की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि विवादों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से संभव है।
- 01भारत ने पश्चिम एशिया में शांति के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
- 02रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की संभावित मध्यस्थता की भूमिका का संकेत दिया।
- 03विदेश मंत्रालय ने कहा कि विवादों का समाधान कूटनीतिक रास्तों से होना चाहिए।
- 04प्रधानमंत्री ने दोनों पक्षों से युद्ध खत्म करने की अपील की है।
- 05भारत किसी भी शांति पहल का समर्थन करने के लिए तैयार है।
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पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच, भारत ने वैश्विक शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में भारत की संभावित मध्यस्थता की भूमिका का संकेत दिया, जिसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत हर उस पहल का समर्थन करेगा जो शांति की ओर ले जाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विवादों का समाधान केवल 'बातचीत और कूटनीति' से ही संभव है। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने शांति स्थापित करने के लिए प्रयास किए हैं, और भविष्य में भारत की भूमिका निभाने की संभावना को नकारा नहीं किया। प्रधानमंत्री ने भी दोनों पक्षों से युद्ध समाप्त करने की अपील की है।
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यदि भारत मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने में सफल होता है, तो इससे क्षेत्र में स्थिरता बढ़ सकती है, जो भारतीय हितों के लिए फायदेमंद होगा।
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