हरियाणा में कच्चे कर्मचारियों के नियमितीकरण पर हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
हरियाणा के कच्चे कर्मचारियों को बड़ी राहत, 6 महीने में नियमितीकरण पर आएगा नया फैसला; नहीं जाएगी किसी की नौकरी
Jagran
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हरियाणा सरकार के कच्चे, अनुबंधित और अस्थायी कर्मचारियों के लिए हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अब नियमितीकरण के दावों पर सुप्रीम कोर्ट के 2026 के निर्णय के आधार पर विचार किया जाएगा। कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति में कोई प्रतिकूल बदलाव नहीं होगा और उन्हें सुरक्षा मिली है।
- 01हरियाणा के कच्चे कर्मचारियों के नियमितीकरण पर नया निर्णय
- 02सुप्रीम कोर्ट के 2026 के निर्णय पर आधारित होगा विचार
- 03कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा
- 04हर कर्मचारी के मामले की व्यक्तिगत जांच होगी
- 05नए ढांचे के तहत नियमितीकरण विवादों का समाधान होगा
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हरियाणा में कच्चे, अनुबंधित और अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के संबंध में हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने 98 अपीलों के संयुक्त निपटारे में स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावों पर अब सुप्रीम कोर्ट के 16 अप्रैल 2026 के 'मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य' निर्णय के आधार पर विचार किया जाएगा। अदालत ने हरियाणा सरकार और अन्य संस्थाओं को निर्देश दिया है कि वे प्रत्येक कर्मचारी के मामले की व्यक्तिगत जांच कर छह महीनों के भीतर स्पीकिंग आर्डर पारित करें। इस दौरान कर्मचारियों की मौजूदा सेवा स्थिति में कोई प्रतिकूल बदलाव नहीं किया जाएगा। इससे कर्मचारियों को सुरक्षा मिली है और उनके कार्यरत स्थिति से हटाने या नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई पर रोक लग गई है। यह फैसला हरियाणा के विभिन्न विभागों में लंबित नियमितीकरण विवादों के समाधान का नया ढांचा तैयार करता है।
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इस फैसले से हरियाणा के कच्चे कर्मचारियों को नियमितीकरण की प्रक्रिया में सुरक्षा और स्पष्टता मिली है।
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