सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाने से ₹30,000 करोड़ का घाटा सहा, कांग्रेस ने लगाया टैक्स वसूली का आरोप
Fuel Prices: तेल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने से सरकार ने खुद सहा ₹30,000 करोड़ का घाटा, विपक्ष ने लगाया था टैक्स वसूली का आरोप
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भारत में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की, जिससे उसे ₹30,000 करोड़ का घाटा हुआ। कांग्रेस ने इसे टैक्स वसूली का प्रमाण बताया, जबकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह घाटा पूर्ववर्ती सरकार द्वारा जारी 'ऑयल बॉंड' के कारण है।
- 01मार्च 2026 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹3 प्रति लीटर कम की गई, जबकि डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया।
- 02कांग्रेस का तर्क है कि 2014 में पेट्रोल की कीमत ₹71 थी, जबकि अब यह ₹98 है, जो अधिक टैक्स वसूली का संकेत है।
- 03सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 में लगभग ₹10,000 करोड़ और 2023-24 में ₹31,150 करोड़ का भुगतान ऑयल बॉंड के लिए किया।
- 04सरकार ने संकट के समय कोई नया कर्ज या बॉंड जारी नहीं किया, बल्कि अपने बजट से एक्साइज ड्यूटी कम की।
- 05सरकारी सूत्रों का दावा है कि मौजूदा सरकार ने पारदर्शी तरीके से टैक्स में कटौती की है।
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भारत में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर टैक्स वसूली का आरोप लगाया है, यह कहते हुए कि 2014 में पेट्रोल की कीमत ₹71 थी, जो अब बढ़कर ₹98 हो गई है। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह वृद्धि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा जारी 'ऑयल बॉंड' के कारण है। मार्च 2026 में, सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹3 प्रति लीटर कम की और डीजल पर इसे शून्य कर दिया, जिससे चालू वित्त वर्ष में सरकार को लगभग ₹30,000 करोड़ का घाटा हुआ। इस घाटे को सरकार ने अपने बजट से उठाया है, बिना नए कर्ज के। सरकारी सूत्रों का कहना है कि मौजूदा सरकार ने पारदर्शी तरीके से टैक्स में कटौती की है, जिससे आम जनता पर बोझ नहीं पड़ा।
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सरकार की एक्साइज ड्यूटी में कटौती से आम जनता पर ईंधन की कीमतों का बोझ नहीं पड़ा, जिससे उन्हें राहत मिली है।
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