हाई कोर्ट ने बिजली कनेक्शन को मौलिक अधिकार माना, दिया नया आदेश
'बिजली कनेक्शन मौलिक अधिकार का हिस्सा, इससे वंचित नहीं किया जा सकता', हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी
Jagran
Image: Jagran
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि बिजली कनेक्शन प्राप्त करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने प्रीति शर्मा को नया बिजली कनेक्शन देने का आदेश दिया, जो पिछले 20 वर्षों से अपने घर में रह रही थीं लेकिन पारिवारिक विवाद के कारण उनका कनेक्शन कट गया था।
- 01बिजली कनेक्शन को मौलिक अधिकार माना गया है।
- 02कोर्ट ने प्रीति शर्मा को नया कनेक्शन देने का आदेश दिया।
- 03बिजली न होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
- 04बिजली विभाग को चार सप्ताह में नया कनेक्शन देना होगा।
- 05अनुच्छेद 21 के तहत बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का अधिकार है।
Advertisement
In-Article Ad
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि बिजली कनेक्शन प्राप्त करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। न्यायालय ने प्रीति शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसके निवास स्थान पर बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता। प्रीति शर्मा ने बताया कि वह पिछले 20 वर्षों से अपने घर में रह रही हैं और उनके छोटे बच्चे हैं। पारिवारिक विवाद के कारण उनका बिजली कनेक्शन कट गया था, जबकि वह नियमित रूप से बिल का भुगतान कर रही थीं। कोर्ट ने बिजली विभाग को आदेश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर प्रीति को नया कनेक्शन प्रदान करे। न्यायालय ने यह भी कहा कि आवश्यक होने पर विभाग याची से कोई यथोचित बांड ले सकता है।
Advertisement
In-Article Ad
इस निर्णय से उन लोगों को लाभ होगा जो बिजली कनेक्शन से वंचित हैं, विशेषकर वे परिवार जो आर्थिक या पारिवारिक विवादों के कारण बिजली की मूलभूत सुविधा से वंचित रह जाते हैं।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि बिजली कनेक्शन को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।

