सैयद हसन का संदेश: कुर्बानी का असली अर्थ और सामाजिक जिम्मेदारी
Bhagalpur News:कुर्बानी जानवर की बलि देने का नाम नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों को त्यागने का देता है संदेश : सैयद हसन

Image: Gramsamachar
भागलपुर के हज़रत सैयद शाह फख़रे आलम हसन ने ईद-उल-अज़हा पर कुर्बानी के असली अर्थ पर जोर दिया, जिसमें जानवर की बलि के बजाय अपने भीतर की बुराइयों को त्यागने का संदेश है। उन्होंने समाज में दया और भाईचारे की भावना को बढ़ाने की अपील की।
- 01ईद-उल-अज़हा हज़रत इब्राहीम और इस्माईल की कुर्बानी की याद दिलाती है।
- 02कुर्बानी का अर्थ केवल जानवर की बलि नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों को त्यागना है।
- 03गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करने की अपील की गई है।
- 04स्वच्छता का ध्यान रखने और फिजूलखर्ची से बचने की सलाह दी गई।
- 05एक सभ्य और नैतिक समाज की स्थापना पर बल दिया गया।
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भागलपुर बेटरमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष हज़रत सैयद शाह फख़रे आलम हसन ने ईद-उल-अज़हा के अवसर पर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने बताया कि यह त्योहार हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की महान कुर्बानी की याद दिलाता है। सैयद हसन ने कहा कि कुर्बानी केवल जानवर की बलि देने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर की बुराइयों जैसे अहंकार, ईर्ष्या और स्वार्थ को त्यागने का भी संदेश देती है। उन्होंने सभी से अपील की कि इस पावन अवसर पर दया, सहानुभूति और मानव सेवा की भावना को विकसित करें। इसके साथ ही, कुर्बानी के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखने और सड़कों को गंदगी से बचाने की भी सलाह दी गई। उन्होंने युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करने और समाज में प्रेम और एकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। अंत में, उन्होंने दुआ की कि अल्लाह सभी की कुर्बानियों और नेक कार्यों को स्वीकार करे।
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सामाजिक एकता और स्वच्छता को बढ़ावा देने से भागलपुर में भाईचारे और सहिष्णुता का माहौल बनेगा।
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