आने वाला है खतरनाक 'सुपर अल-नीनो', जलवायु पर पड़ेगा गंभीर असर
आ रहा है सबसे खौफनाक 'सुपर अल-नीनो', साथ ला रहा क्लाइमेट बम

Image: Aaj Tak
यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स के अनुसार, 2026 में एक 'सुपर अल-नीनो' का सामना करना पड़ सकता है, जो प्रशांत महासागर के तापमान को सामान्य से +3°C से +4°C तक बढ़ा सकता है। इसका प्रभाव वैश्विक कृषि, खाद्य सुरक्षा और भारतीय मॉनसून पर विनाशकारी हो सकता है।
- 012026 में 'सुपर अल-नीनो' के कारण प्रशांत महासागर का तापमान +3°C से +4°C तक बढ़ सकता है।
- 02अल-नीनो का भारतीय मॉनसून पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे सूखा और फसल बर्बादी की संभावना है।
- 031982-83, 1997-98 और 2015-16 में आए अल-नीनो ने वैश्विक स्तर पर भारी तबाही मचाई थी।
- 04अल-नीनो के कारण भारत में सर्दियों में असामान्य गर्मी और गर्मी के मौसम में लू का सामना करना पड़ सकता है।
- 05यह घटना वैश्विक स्तर पर कृषि उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती है।
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यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) द्वारा जून 2026 में जारी किए गए नए मौसम मॉडल के अनुसार, प्रशांत महासागर में एक 'सुपर अल-नीनो' की संभावना है, जो तापमान को सामान्य से +3°C से +4°C तक बढ़ा सकता है। यह स्थिति वैश्विक कृषि, खाद्य सुरक्षा और विशेष रूप से भारतीय मॉनसून पर विनाशकारी प्रभाव डाल सकती है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, जब भी 'सुपर अल-नीनो' आया है, तब उसने सूखा और बाढ़ जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न की हैं। भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर निर्भर करती है, और यदि यह अल-नीनो सक्रिय होता है, तो सूखा और फसल बर्बादी की संभावना बढ़ जाएगी। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर कॉफी, चीनी और पाम ऑयल जैसी वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो सकती है। यह समय सरकार और नीति-निर्माताओं के लिए जल संरक्षण और खाद्य भंडारण की रणनीतियों पर काम करने का है।
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यदि सुपर अल-नीनो सक्रिय होता है, तो भारत में कृषि संकट और खाद्य मुद्रास्फीति हो सकती है।
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